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UPSC CSE 2024: Increased participation from Hindi and regional language candidates, but a decline observed in IAS-IPS selections

UPSC CSE 2024: हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में बढ़ी भागीदारी, लेकिन IAS-IPS चयन में दिखी गिरावट

UPSC CSE 2024: Increased participation from Hindi and regional language candidates, but a decline observed in IAS-IPS selections

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने हिंदी तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में मुख्य परीक्षा (Mains) लिखी है। हालांकि, इन भाषाओं के माध्यम से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के बावजूद IAS और IPS जैसे शीर्ष पदों के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में इस संबंध में विस्तृत आंकड़े साझा किए हैं। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन अंतिम चयन में उनकी हिस्सेदारी उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।

हिंदी-मैथिली माध्यम से IAS-IPS के लिए कितने उम्मीदवार हुए अनुशंसित?

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, हिंदी-मैथिली माध्यम से सिविल सेवा मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में से IAS और IPS पदों के लिए अनुशंसित अभ्यर्थियों की संख्या पिछले चार वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है।

वर्ष 2021 में ऐसे 10 उम्मीदवारों को IAS और IPS के लिए अनुशंसित किया गया था। यह संख्या 2022 में बढ़कर 27 पहुंच गई, जो चार वर्षों के दौरान सबसे अधिक रही। इसके बाद 2023 में यह घटकर 14 रह गई और 2024 में केवल 5 उम्मीदवार ही IAS तथा IPS पदों के लिए अनुशंसित हो सके।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि हिंदी-मैथिली माध्यम से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की उपस्थिति बनी हुई है, लेकिन शीर्ष सेवाओं में चयन का प्रतिशत स्थिर नहीं रहा है।

क्षेत्रीय भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वालों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी

राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, हिंदी और आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भारतीय भाषाओं में UPSC मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ी है।

वर्ष 2021 में ऐसे 538 उम्मीदवार थे। यह संख्या 2022 में बढ़कर 587 और 2023 में 599 हो गई। सबसे बड़ा बदलाव 2024 में देखने को मिला, जब क्षेत्रीय भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 1,133 पहुंच गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है।

यह वृद्धि दर्शाती है कि देशभर के अभ्यर्थियों में अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा देने का भरोसा मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाषाई विकल्पों की उपलब्धता और क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ती तैयारी सुविधाओं ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्य परीक्षा में सफलता के आंकड़े क्या कहते हैं?

हालांकि क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अपेक्षाकृत सीमित रही।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022 में 71 उम्मीदवार सफल हुए थे। यह संख्या 2023 में घटकर 57 रह गई और 2024 में 50 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की। इससे यह स्पष्ट होता है कि उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ने के बावजूद प्रतिस्पर्धा भी लगातार कठिन होती जा रही है।

बिहार के उम्मीदवारों का प्रदर्शन

राज्यसभा में बिहार से UPSC सिविल सेवा परीक्षा में अनुशंसित उम्मीदवारों का आंकड़ा भी साझा किया गया। इसके अनुसार बिहार का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में मजबूत रहा है।

वर्ष 2021 में बिहार से 54 उम्मीदवारों की अनुशंसा हुई थी। इसके बाद संख्या में वृद्धि दर्ज की गई और 2023 में यह आंकड़ा 82 तक पहुंच गया। हालांकि 2024 में इसमें कुछ गिरावट आई और 72 उम्मीदवार अनुशंसित हुए।

इसके बावजूद बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां से हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हैं।

क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

UPSC के ताजा आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। एक ओर हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर हिंदी-मैथिली माध्यम से IAS और IPS जैसी शीर्ष सेवाओं के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या 2022 के 27 से घटकर 2024 में केवल 5 रह गई है।

यह स्थिति बताती है कि क्षेत्रीय भाषाओं में भागीदारी बढ़ने के बावजूद अंतिम चयन तक पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को पहले की तरह ही कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ती भाषाई भागीदारी का असर अंतिम चयन सूची में किस रूप में दिखाई देता है।

 

 

 

Asmita Sarkar

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