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Rahul Gandhi vs Kiren Rijiju: Row Over Police Action Against Students at Jantar Mantar Intensifies

जंतर-मंतर पर छात्रों पर कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का रिजिजू पर पलटवार, बोले- बच्चों से झूठ मत बोलिए

Rahul Gandhi vs Kiren Rijiju: Row Over Police Action Against Students at Jantar Mantar Intensifies

जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जहां दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी की जान नहीं गई और किसी को गंभीर चोट नहीं लगी, वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

राहुल गांधी ने सरकार पर छात्रों के साथ कथित ज्यादती को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के बच्चों से झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि उनके पास अपनी आंखों से देखी घटनाओं की यादें हैं। यह विवाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए छात्रों के मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है।

‘छात्रों पर पैलेट गन और कील वाली लाठियां चलाने की तारीफ कैसे?’

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में किरेन रिजिजू के बयान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि संसद से कुछ दूरी पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर पैलेट गन और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल की तारीफ कैसे की जा सकती है।

राहुल गांधी ने दावा किया कि इस कार्रवाई में एक छात्र की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा और एक महिला प्रदर्शनकारी के कान में चोट आई। उन्होंने कहा कि वह खुद घायल छात्रों से मिले हैं और घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आ चुके हैं।

हालांकि, पुलिस कार्रवाई और पैलेट के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग समय पर आधिकारिक दावे और सामने आए दस्तावेजों में अंतर रहा है। दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में पैलेट या रबर गन के इस्तेमाल से इनकार किया था। बाद में संसद मार्ग थाने की एक जनरल डायरी एंट्री सामने आई, जिसमें 20 जुलाई को भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान एंटी-रायट गन और दो प्लास्टिक पैलेट राउंड के इस्तेमाल का उल्लेख है। रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई एक पुलिस उपायुक्त के आदेश पर की गई थी।

घायल छात्रों के इलाज के रिकॉर्ड भी सामने आए

प्रदर्शन के बाद कई घायलों के इलाज की जानकारी सामने आई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन लोगों का अस्पताल में पैलेट से लगी चोटों के लिए इलाज किया गया था। इनमें 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब भी शामिल थे, जिनकी एक आंख की रोशनी को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। एक अन्य प्रदर्शनकारी के चेहरे पर चोट के बाद सर्जरी की गई थी।

हिंदुस्तान टाइम्स ने मेडिकल रिकॉर्ड के हवाले से एक महिला प्रदर्शनकारी के दाहिने कान में चोट और सर्जरी की जानकारी भी दी थी। रिपोर्ट में मेडिकल रिकॉर्ड में चोट को संदिग्ध गोली लगने से जुड़ा बताया गया था।

इन घटनाओं के बीच पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए किसी भी चोट या हथियार के इस्तेमाल से जुड़े हर दावे को संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों के आधार पर देखना महत्वपूर्ण है।

राहुल गांधी ने अमित शाह को भी घेरा

राहुल गांधी ने अपने बयान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे संसद सत्र के दौरान अमित शाह विपक्ष के सवालों से बचते रहे। राहुल ने यह भी सवाल उठाया कि छात्रों के साथ हुई कार्रवाई को लेकर सरकार की ओर से अब तक माफी क्यों नहीं मांगी गई।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गलती होने के बाद उसे स्वीकार करने के बजाय उसे नकारना समस्या को और गंभीर बनाता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार पहले छात्रों पर कार्रवाई करती है और फिर यह कहती है कि कुछ हुआ ही नहीं।

राहुल गांधी इससे पहले भी 20 जुलाई की घटना को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने संसद में और संसद के बाहर यह मुद्दा उठाते हुए पूछा था कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया।

क्या कहा था किरेन रिजिजू ने?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को संसद में जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि किसी प्रदर्शनकारी की मौत नहीं हुई और किसी को गंभीर चोट नहीं लगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस ने स्थिति को संभाला।

रिजिजू के बयान का मकसद पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों का जवाब देना था। लेकिन उनके इस बयान के बाद राहुल गांधी ने सरकार पर छात्रों की चोटों और घटना से जुड़े रिकॉर्ड को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

विवाद का केंद्र क्या है?

जंतर-मंतर विवाद अब सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा है। एक तरफ सरकार पुलिस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कदम के तौर पर देख रही है, वहीं विपक्ष छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का आरोप लगा रहा है।

इस मामले में पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और सुरक्षा बलों की जांच इसलिए अहम हो गई है, क्योंकि पैलेट के इस्तेमाल को लेकर शुरुआती सरकारी दावों और बाद में सामने आए पुलिस दस्तावेजों के बीच सवाल उठे हैं। CRPF ने भी घटना में RAF की भूमिका और कथित पैलेट इस्तेमाल को लेकर जांच शुरू की थी।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के अंत में सरकार को संदेश देते हुए कहा कि देश के बच्चों से झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि उनके पास आंखें भी हैं और याददाश्त भी। वहीं, सरकार की ओर से घटना को लेकर दिया गया पक्ष यह है कि सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम किया।

जंतर-मंतर की घटना पर जारी यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में संसद में भी देखने को मिल सकता है। अब इस मामले में सामने आ रहे आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि 20 जुलाई को पुलिस कार्रवाई के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

 

Asmita Sarkar

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