
दिल्ली को देश में शिक्षा के बेहतर मॉडल के तौर पर देखा जाता है, लेकिन राजधानी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकारी स्कूलों में नियमित शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं और कई स्कूलों को गेस्ट टीचर्स के सहारे पढ़ाई चलानी पड़ रही है। दिल्ली सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज करने की बात कही है।
जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में करीब 10 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे अगले एक-दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे साफ है कि शिक्षकों की कमी सरकार के सामने बड़ी प्राथमिकता है।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कितने शिक्षक हैं?
दिल्ली में सरकारी स्कूलों की संख्या और शिक्षकों की जरूरत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते हैं। केवल शिक्षा निदेशालय के स्कूलों की बात करें तो करीब 1,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं दिल्ली सरकार और नगर निगम के स्कूलों को मिलाकर सार्वजनिक स्कूल व्यवस्था का दायरा काफी बड़ा है।
UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों में दिल्ली के सभी स्कूलों को मिलाकर स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों की संख्या दर्ज की गई है। UDISE+ का डेटा सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी समेत सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को कवर करता है, इसलिए इसे केवल दिल्ली सरकार के स्कूलों के आंकड़े के रूप में देखना सही नहीं होगा।
यही वजह है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक कमी समझने के लिए शिक्षा निदेशालय और DSSSB के भर्ती आंकड़े ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
करीब 10 हजार नियमित पद खाली होने की बात
दिल्ली सरकार के मुताबिक सरकारी स्कूलों में करीब 10 हजार शिक्षक पद खाली हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जुलाई 2026 में कहा था कि इन पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द नियुक्तियां पूरी करने का लक्ष्य है।
शिक्षकों की कमी का असर खास तौर पर उन स्कूलों में ज्यादा पड़ता है जहां छात्रों की संख्या अधिक है। ऐसे स्कूलों में उपलब्ध शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं या दूसरे प्रशासनिक काम भी संभालने पड़ सकते हैं। इसका असर पढ़ाई के लिए मिलने वाले समय और छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान, दोनों पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चुनौती विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता की है। गणित और विज्ञान जैसे विषयों में पर्याप्त विषय विशेषज्ञ नहीं होने पर छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। खासकर कक्षा 6 से 10 के स्तर पर इन विषयों की मजबूत समझ आगे की पढ़ाई के लिए बेहद जरूरी होती है।
5,346 TGT की भर्ती का रास्ता साफ
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए दिल्ली सरकार ने अक्टूबर 2025 में 5,346 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी TGT के पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। ये नियुक्तियां कक्षा 6 से 10 के छात्रों के लिए सरकारी और नगर निगम के स्कूलों में की जानी हैं।
DSSSB के आधिकारिक विज्ञापन संख्या 06/2025 में गणित, सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, हिंदी, संस्कृत, उर्दू, पंजाबी और अन्य विषयों के TGT पद शामिल थे। विज्ञापन में कुल 5,346 रिक्तियां दी गई थीं। आवेदन प्रक्रिया 9 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई थी और 7 नवंबर 2025 तक आवेदन लिए गए थे।
इस भर्ती का मकसद केवल खाली पद भरना नहीं है, बल्कि माध्यमिक कक्षाओं में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर करना भी है।
गेस्ट टीचर्स से भी चल रहा है काम
नियमित भर्ती पूरी होने तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। शिक्षा निदेशालय ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और टेकओवर स्कूलों में काम कर रहे गेस्ट टीचर्स के री-एंगेजमेंट और री-डिप्लॉयमेंट का आदेश जारी किया है।
शिक्षा निदेशालय के रिकॉर्ड में 2026 के दौरान अलग-अलग विषयों के गेस्ट टीचर्स की री-एलोकेशन और नियुक्ति से जुड़े कई आदेश भी जारी हुए हैं। इनमें गणित, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान और अन्य विषय शामिल हैं।
इससे पता चलता है कि नियमित भर्ती के साथ-साथ तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए गेस्ट टीचर्स पर भी निर्भरता बनी हुई है।
भर्ती में देरी क्यों बनती है समस्या?
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती मुख्य रूप से DSSSB के जरिए होती है। परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों के दस्तावेज शिक्षा निदेशालय को भेजे जाते हैं, जहां उनकी जांच और सत्यापन के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। अतीत में दस्तावेजों की जांच और नियुक्ति में देरी को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं।
लंबी भर्ती प्रक्रिया का सीधा असर स्कूलों पर पड़ता है। जब नियमित पद खाली रहते हैं तो स्कूलों को गेस्ट या कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है। दूसरी तरफ, नियमित शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।
सिर्फ शिक्षक संख्या नहीं, विषयवार नियुक्ति भी जरूरी
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का समाधान केवल कुल संख्या बढ़ाने से नहीं होगा। स्कूलों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों के शिक्षकों की जरूरत के हिसाब से नियुक्ति करना भी जरूरी है।
DSSSB की 5,346 TGT भर्ती में अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग संख्या में पद रखे गए थे। उदाहरण के लिए गणित, सामाजिक विज्ञान और प्राकृतिक विज्ञान के साथ हिंदी, संस्कृत, उर्दू और पंजाबी के पद भी शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार विषयवार स्टाफ की जरूरत को ध्यान में रखकर भर्ती कर रही है।
आगे क्या होगा?
दिल्ली सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती भर्ती प्रक्रिया को समय पर पूरा करके शिक्षकों को स्कूलों में तैनात करना है। जुलाई 2026 में सरकार ने करीब 10 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को अंतिम चरण में बताया था।
साथ ही 5,346 TGT पदों की भर्ती प्रक्रिया भी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर इन नियुक्तियों के साथ लंबे समय से खाली अन्य पद भी समय पर भरे जाते हैं, तो स्कूलों में शिक्षकों का काम का बोझ कम किया जा सकता है और छात्रों को विषयवार बेहतर पढ़ाई मिल सकती है।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों की चुनौती अब केवल स्कूल भवन, स्मार्ट क्लास या दूसरी सुविधाओं तक सीमित नहीं है। पर्याप्त संख्या में नियमित और विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध कराना भी शिक्षा की गुणवत्ता के लिए उतना ही जरूरी है। आने वाले समय में भर्ती की रफ्तार और शिक्षकों की स्कूलों में वास्तविक तैनाती यह तय करेगी कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक कमी की समस्या कितनी जल्दी कम होती है।




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