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IGKV Paper Leak: BSc Agriculture Entomology Exam Cancelled After Question Paper Circulated on WhatsApp

IGKV Paper Leak: परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंचा एंटोमोलॉजी पेपर, BSc Agriculture की परीक्षा रद्द

IGKV Paper Leak: BSc Agriculture Entomology Exam Cancelled After Question Paper Circulated on WhatsApp

IGKV Paper Leak: छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में बीएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर की एग्रीकल्चरल एंटोमोलॉजी यानी कीट विज्ञान की परीक्षा को कथित प्रश्नपत्र लीक की शिकायत के बाद रद्द कर दिया गया है। 20 अगस्त 2026 को होने वाली परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले WhatsApp पर छात्रों के बीच प्रसारित होने की बात सामने आई थी। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

हालांकि, एक जरूरी तथ्य यह है कि विश्वविद्यालय की ओर से जारी परीक्षा संबंधी सूचना में परीक्षा रद्द करने का आधिकारिक कारण “administrative reasons” बताया गया है। वहीं, विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार परीक्षा रद्द करने का फैसला प्रश्नपत्र लीक की शिकायतों और बाद में सामने आए तथ्यों के बाद लिया गया। इसलिए जांच पूरी होने तक इसे कथित पेपर लीक के तौर पर ही देखना उचित है।

परीक्षा से पहले WhatsApp पर वायरल हुआ प्रश्नपत्र

बीएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर के AENT-221 Agricultural Entomology के तहत Pest Management in Crops and Stored Grains-1 (Rabi Crops) की परीक्षा 20 अगस्त को सुबह 10 बजे शुरू होनी थी और दोपहर 1 बजे तक चलनी थी।

परीक्षा से पहले छात्रों के कुछ WhatsApp ग्रुप में एक प्रश्नपत्र प्रसारित होने की शिकायत सामने आई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय को परीक्षा से पहले ईमेल के जरिए भी शिकायत मिली थी। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक पक्ष के अनुसार शुरुआती ईमेल में प्रश्नपत्र की कॉपी नहीं भेजी गई थी। बाद में छात्रों के बीच एक प्रश्नपत्र वायरल होने की जानकारी सामने आई।

एक विश्वविद्यालय अधिकारी ने PTI को बताया कि वायरल प्रश्नपत्र और वास्तविक प्रश्नपत्र में पूरी तरह समानता नहीं थी, लेकिन करीब 70 फीसदी सवाल वास्तविक पेपर से मिलते-जुलते पाए गए। इसी के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। यह तथ्य जांच के अंतिम निष्कर्ष का विकल्प नहीं है और पूरे मामले की तस्वीर जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी।

करीब 1,200 छात्रों पर पड़ा असर

इस परीक्षा में विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि महाविद्यालयों के करीब 1,200 विद्यार्थियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में 27 कृषि कॉलेजों के छात्रों के प्रभावित होने की बात कही गई है। वहीं विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक सर्कुलर 33 संबद्ध कॉलेजों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसलिए प्रभावित कॉलेजों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।

परीक्षा रद्द होने के बाद विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जानी है। छात्रों को संशोधित तारीख और केंद्र से जुड़ी जानकारी के लिए अपने संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना देखते रहने की सलाह दी गई है।

पांच सदस्यीय जांच समिति की भूमिका क्या होगी?

मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है। रिपोर्टों में समिति को पांच सदस्यीय बताया गया है, जबकि PTI की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की जांच समिति के सदस्यों की संख्या चार बताई गई है। ऐसे में समिति की अंतिम संरचना को लेकर विश्वविद्यालय की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना उचित होगा।

जांच का मुख्य सवाल यही है कि परीक्षा का वास्तविक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा। समिति को वायरल प्रश्नपत्र और मूल प्रश्नपत्र का मिलान करने, उसके स्रोत का पता लगाने और यह जांचने की जरूरत होगी कि प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय या किसी अन्य माध्यम से बाहर गया था या नहीं।

जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा

मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर जांच समिति गठित की है और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। जिन छात्रों ने परीक्षा की तैयारी की थी, उन्हें अब दोबारा परीक्षा देनी होगी। वहीं, प्रश्नपत्र के पहले से बाहर पहुंचने की पुष्टि होने पर परीक्षा की निष्पक्षता पर भी सवाल उठता है।

छात्रों के लिए अब क्या जरूरी है?

जिन विद्यार्थियों की परीक्षा रद्द हुई है, उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी भी तारीख या परीक्षा कार्यक्रम पर भरोसा करने के बजाय IGKV और अपने संबंधित कॉलेज की आधिकारिक सूचना देखनी चाहिए।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर नवीनतम नोटिस और परीक्षा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

छात्रों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी जारी रखें और संशोधित कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। अगर जांच में पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करना विश्वविद्यालय और संबंधित जांच एजेंसियों की अगली जिम्मेदारी होगी।

परीक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

IGKV में सामने आया यह मामला परीक्षा प्रश्नपत्र की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि प्रश्नपत्र वास्तव में कहां से बाहर आया और इसमें कौन जिम्मेदार था। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि परीक्षा रद्द कर दी गई है, दोबारा परीक्षा की तैयारी की जा रही है और प्रश्नपत्र के प्रसारित होने की शिकायत की जांच हो रही है। अंतिम सच जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

 

Asmita Sarkar

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