
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान इंडस्ट्री का व्यावहारिक अनुभव हासिल करने की चाह रखने वाले छात्रों के लिए मुंबई यूनिवर्सिटी ने नई पहल शुरू की है। University of Mumbai ने Apprenticeship Embedded B.E. Degree Programme (AEDP) शुरू किया है। इसके तहत चुने गए बीई छात्रों को डिग्री की पढ़ाई के साथ अंतिम वर्ष में एक साल की अप्रेंटिसशिप करने का मौका मिलेगा।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के Faculty of Science and Technology के तहत शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को सिर्फ कक्षा में मिलने वाले सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें इंडस्ट्री के कामकाज, वास्तविक प्रोजेक्ट और नौकरी के लिए जरूरी कौशल का अनुभव देना है। विश्वविद्यालय ने इस पहल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों और AICTE के दिशानिर्देशों के अनुरूप बताया है।
सातवें और आठवें सेमेस्टर में होगी अप्रेंटिसशिप
AEDP में चयनित छात्रों को बीई के सातवें और आठवें सेमेस्टर के दौरान एक साल की अप्रेंटिसशिप करनी होगी। इस दौरान वे इंडस्ट्री के वास्तविक कामकाजी माहौल में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई में सीखी गई बातों को काम में लागू कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय के अनुसार, छात्रों को कम से कम 1,260 घंटे की व्यावहारिक ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। अप्रेंटिसशिप सफलतापूर्वक पूरी करने पर छात्रों को उनके बीई कार्यक्रम के तहत 42 अकादमिक क्रेडिट मिलेंगे।
इस दौरान छात्रों को इंडस्ट्री प्रोजेक्ट, काम की प्रक्रियाओं, आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता मानकों और पेशेवर कार्य संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें डिग्री पूरी करने से पहले ही कार्यस्थल की वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है।
हर छात्र को नहीं मिलेगा मौका
मुंबई यूनिवर्सिटी ने इस कार्यक्रम में सीटों को सीमित रखा है। फाइनल ईयर के अधिकतम 15 प्रतिशत बीई छात्रों को ही Apprenticeship Embedded B.E. Programme में शामिल किया जा सकेगा। इसके लिए छात्रों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।
छात्र का पांचवें सेमेस्टर के अंत तक कम से कम 6.75 CGPA होना जरूरी है। पात्र छात्रों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा और अधिक CGPA वाले छात्रों को प्राथमिकता मिलेगी।
हालांकि, Honours, Minor या Honours with Research कार्यक्रम चुनने वाले छात्र इस अप्रेंटिसशिप-आधारित बीई कार्यक्रम के लिए पात्र नहीं होंगे।
तकनीकी ज्ञान के साथ इन स्किल्स पर भी जोर
इस कार्यक्रम का फोकस सिर्फ इंजीनियरिंग की तकनीकी जानकारी पर नहीं रहेगा। छात्रों में कम्युनिकेशन, टीमवर्क, समस्या का समाधान, निर्णय लेने और समय प्रबंधन जैसी पेशेवर क्षमताएं विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इंडस्ट्री में काम करने के दौरान छात्रों को अनुभवी लोगों के साथ काम करने और वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव मिलेगा। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि कंपनियों में इंजीनियरों से किस तरह के कौशल और व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
नौकरी के लिए तैयार करने की कोशिश
आज इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ कंपनियां छात्रों से व्यावहारिक अनुभव और इंडस्ट्री से जुड़े कौशल की भी उम्मीद करती हैं। ऐसे में मुंबई यूनिवर्सिटी का यह कार्यक्रम छात्रों को डिग्री पूरी करने से पहले ही कार्यस्थल का अनुभव देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम में शामिल होने से नौकरी की गारंटी नहीं मिलती। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को इंडस्ट्री का अनुभव देना और उनकी रोजगार संबंधी तैयारी को मजबूत करना है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, AEDP के जरिए शिक्षा संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्यक्रम?
मुंबई यूनिवर्सिटी का Apprenticeship Embedded B.E. Programme उन छात्रों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री का वास्तविक अनुभव लेना चाहते हैं। एक साल की अप्रेंटिसशिप के दौरान मिलने वाला अनुभव उन्हें नौकरी के शुरुआती दौर में कामकाज समझने में मदद कर सकता है।
हालांकि, सीटें सीमित होने और CGPA आधारित चयन के कारण हर बीई छात्र इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएगा। इच्छुक छात्रों को अपने कॉलेज और विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्रता और चयन प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।




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