
अमेरिका में सख्त होती वीजा जांच, बदलती आव्रजन नीतियों और भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर अब वहां उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी छात्रों पर साफ दिखाई देने लगा है। Common App के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के आवेदन चक्र में 1 मार्च तक अमेरिकी कॉलेजों के लिए अंतरराष्ट्रीय आवेदकों की संख्या 9% घटकर 1,38,127 रह गई। यह गिरावट पिछले कई वर्षों के बढ़ते रुझान के बाद आई है। एशिया से आवेदकों की संख्या 10% और अफ्रीका से 16% कम हुई है।
खास बात यह है कि इसी अवधि में अमेरिका में कॉलेज आवेदन का कुल आंकड़ा बढ़ा है। 1 मार्च तक Common App के जरिए आवेदन करने वाले प्रथम वर्ष के छात्रों की संख्या करीब 2% बढ़ी, जबकि कुल आवेदन 5% बढ़कर 94 लाख से ज्यादा हो गए। यानी अमेरिका में पढ़ाई के लिए छात्रों की कुल मांग कमजोर नहीं हुई है, लेकिन विदेशी छात्रों की रुचि में स्पष्ट कमी आई है।
भारतीय छात्रों के आवेदन 15% घटे
अमेरिका में पढ़ाई की योजना बनाने वाले भारतीय छात्रों के लिए यह आंकड़ा खास महत्व रखता है। Common App के अनुसार, 2025-26 आवेदन चक्र में 1 मार्च तक भारत से आने वाले आवेदकों की संख्या 15% कम हुई। भारत इस प्लेटफॉर्म पर चीन के बाद प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आवेदक देशों में रहा है, लेकिन इस बार भारतीय आवेदनों में गिरावट एशिया के औसत से भी ज्यादा रही।
Common App के आंकड़ों के अनुसार चीन से आवेदकों की संख्या 3%, कनाडा से 13%, पाकिस्तान से 4% और दक्षिण कोरिया से 4% घटी। घाना से 34%, नाइजीरिया से 17% और इथियोपिया से 29% की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट अमेरिका के महाद्वीपों से आने वाले आवेदकों की संख्या 4% बढ़ी।
यह आंकड़े केवल आवेदन से जुड़े हैं। इन्हें सीधे दाखिले या अंतिम नामांकन में गिरावट नहीं माना जा सकता। फिर भी, आवेदन के स्तर पर आया यह बदलाव अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए चिंता का संकेत है, क्योंकि यही छात्र आगे चलकर दाखिले और नामांकन के संभावित उम्मीदवार बनते हैं।
नए विदेशी छात्रों की संख्या पहले ही 17% घट चुकी है
विदेशी छात्रों के लिए चुनौती केवल आवेदन तक सीमित नहीं है। अमेरिकी उच्च शिक्षा पर नजर रखने वाली Institute of International Education (IIE) की Fall 2025 Snapshot रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पतझड़ सत्र में पहली बार अमेरिकी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 17% घट गई। 828 अमेरिकी संस्थानों से मिले आंकड़ों में कुल अंतरराष्ट्रीय छात्र संख्या में 1% की कमी दर्ज हुई, जबकि नए छात्रों की संख्या में गिरावट कहीं ज्यादा रही।
IIE के अनुसार, 2024-25 में अमेरिका में कुल 11,77,766 अंतरराष्ट्रीय छात्र थे। इनमें भारत 3,63,019 छात्रों के साथ सबसे बड़ा स्रोत देश बनकर उभरा था। उस साल भारत से आने वाले छात्रों की संख्या 10% बढ़ी थी। ऐसे में 2025-26 और 2026-27 के आवेदन तथा नामांकन में आई गिरावट भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।
एशिया और अफ्रीका पर सबसे ज्यादा असर
Common App के ताजा आंकड़ों में एशिया और अफ्रीका उन क्षेत्रों में हैं, जहां विदेशी आवेदकों की संख्या सबसे ज्यादा घटी है। 1 मार्च तक एशिया से आवेदक 10% और अफ्रीका से 16% कम हुए। पिछले वर्षों में इन क्षेत्रों से अमेरिकी कॉलेजों के लिए आवेदन लगातार बढ़ रहे थे।
जानकारों के मुताबिक, वीजा मिलने की अनिश्चितता, आवेदन के बाद अमेरिका पहुंचने को लेकर चिंता और बदलते इमिग्रेशन नियम छात्रों के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे लोकप्रिय शिक्षा केंद्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों से हटने वाले छात्रों का फायदा मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
मिड-रेंज कॉलेजों पर ज्यादा दबाव की आशंका
विदेशी छात्रों की संख्या में कमी का असर सभी अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर एक जैसा नहीं होगा। प्रतिष्ठित और बेहद चुनिंदा विश्वविद्यालयों के पास घरेलू और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी मांग के कई स्रोत हैं। लेकिन मध्यम स्तर के निजी कॉलेज और क्षेत्रीय सार्वजनिक विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों से मिलने वाली फीस पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।
अगर विदेशी छात्रों का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका के बजाय दूसरे देशों को चुनता है, तो ऐसे संस्थानों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ ट्यूशन फीस पर नहीं, बल्कि हॉस्टल, स्थानीय परिवहन, किराये, भोजन और दूसरे छात्र खर्च से जुड़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
3.4 अरब डॉलर और करीब 40 हजार नौकरियों का खतरा
विदेशी छात्रों की संख्या में संभावित गिरावट का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। NAFSA और JB International के अगस्त 2026 के विश्लेषण के मुताबिक, Fall 2026 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में संभावित गिरावट से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 3.4 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है और करीब 40 हजार नौकरियों पर असर पड़ सकता है। अध्ययन में 2026 के पतझड़ सत्र में करीब 1,11,000 कम अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संभावना का अनुमान लगाया गया है।
NAFSA के अनुमान के मुताबिक, 2024-25 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 42.9 अरब डॉलर का योगदान दिया और 3,55,736 नौकरियों को समर्थन दिया। इसलिए विदेशी छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट का असर विश्वविद्यालयों के साथ-साथ उन शहरों और स्थानीय कारोबारों पर भी पड़ सकता है, जहां बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र रहते हैं।
अमेरिका की वीजा और इमिग्रेशन नीतियां बनीं बड़ी चिंता
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया और इमिग्रेशन नियमों में बदलाव पिछले कुछ समय से बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। NAFSA के Fall 2026 विश्लेषण में वीजा अपॉइंटमेंट में दिक्कत, वीजा प्रक्रिया और नीति में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय छात्र संख्या में संभावित गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा की पुरानी ‘Duration of Status’ व्यवस्था को बदलने की दिशा में कदम उठाया है। NAFSA के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 से नई व्यवस्था लागू होने पर F और J वीजा धारकों के लिए पहले जैसी अनिश्चित अवधि वाली स्थिति की जगह निश्चित ‘Admit-Until-Date’ व्यवस्था आएगी। इससे लंबे कोर्स करने वाले छात्रों के लिए योजना बनाना अधिक जटिल हो सकता है।
H-1B शुल्क का मुद्दा भी बढ़ा रहा है अनिश्चितता
पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी छात्रों के लिए H-1B व्यवस्था में बदलाव भी अहम है। यहां एक जरूरी तथ्य यह है कि H-1B और छात्र वीजा अलग-अलग श्रेणियां हैं। H-1B शुल्क सीधे कॉलेज में दाखिले के लिए लागू शुल्क नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन ने 2025 में नए H-1B मामलों के लिए 1,00,000 डॉलर के भुगतान की व्यवस्था की थी। सितंबर 2025 की राष्ट्रपति घोषणा के अनुसार यह भुगतान अमेरिका से बाहर मौजूद कुछ नए H-1B आवेदकों के मामलों से जुड़ा था।
अब अगस्त 2026 में अमेरिकी प्रशासन ने नए H-1B आवेदनों पर 1,03,265 डॉलर शुल्क को स्थायी रूप से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को लेकर कानूनी चुनौती भी बनी हुई है। Reuters के अनुसार, 2025 में लागू किया गया 1,00,000 डॉलर शुल्क जून 2026 में एक संघीय जज द्वारा अवैध करार देकर रोका गया था और मामला अपील अदालत में है।
इस तरह के बदलाव उन छात्रों के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं जो अमेरिका में पढ़ाई के बाद वहीं काम करने और करियर बनाने की योजना बनाते हैं।
क्या बदल सकता है अमेरिका का विदेशी छात्रों का बाजार?
अमेरिका अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र गंतव्य है। 2024-25 में वहां 11.77 लाख से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्र पढ़ रहे थे और भारत सबसे बड़ा स्रोत देश था।
लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि केवल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा अब छात्रों के फैसले का एकमात्र आधार नहीं रह गई है। वीजा मिलने की संभावना, पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर, रहने की अवधि और इमिग्रेशन नियमों की स्थिरता भी छात्रों और उनके परिवारों के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है।
अगर आवेदन और नामांकन में गिरावट आगे भी जारी रहती है, तो अमेरिका को विदेशी छात्रों के लिए ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य शिक्षा केंद्रों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, भारतीय छात्रों के लिए इसका मतलब यह है कि अमेरिका में पढ़ाई का फैसला लेते समय केवल यूनिवर्सिटी और कोर्स की रैंकिंग नहीं, बल्कि वीजा नियम, पढ़ाई के बाद काम के विकल्प और बदलती इमिग्रेशन नीतियों को भी ध्यान से देखना जरूरी होगा।




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