
सीबीएसई कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन को लेकर परेशान छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को दोबारा पुनर्मूल्यांकन पोर्टल खोलने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह सुविधा सभी छात्रों के लिए तय समय तक उपलब्ध थी और अब इसे दोबारा खोलने से बड़ी संख्या में नए दावे सामने आ सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 25 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से छात्रों को आवेदन करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की मांग की गई थी। दलील दी गई कि CBSE की वेबसाइट में तकनीकी समस्या के कारण कई छात्र ऑन-स्क्रीन वेरिफिकेशन के लिए आवेदन नहीं कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दी दोबारा मौका देने की अनुमति?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि CBSE ने सभी उम्मीदवारों के लिए तय अवधि में आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई थी। ऐसे में अब दोबारा पोर्टल खोलने से हजारों या लाखों नए दावों का रास्ता खुल सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान कहा, “अगर आप बस का इस्तेमाल नहीं करते, तो आपकी बस छूट जाती है।”
CBSE की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि निर्धारित अवधि के दौरान करीब 1.68 लाख छात्रों ने सफलतापूर्वक आवेदन किया था। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले इसी तरह की चुनौती को खारिज कर चुका है। कोर्ट ने इन दलीलों के बाद दोबारा पोर्टल खोलने के मामले में हस्तक्षेप नहीं किया।
इससे पहले 21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBSE से OSM से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए स्थायी व्यवस्था पर जवाब मांगा था। उस समय कोर्ट को बताया गया था कि शिकायत वाले छात्रों के लिए एक सप्ताह की अतिरिक्त विंडो दी गई थी और करीब 1.68 लाख छात्रों ने इसका लाभ उठाया।
क्या है CBSE का On-Screen Marking सिस्टम?
CBSE ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल किया है। इसमें छात्रों की मूल कागजी उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाता है और शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उनकी डिजिटल कॉपी देखकर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं। यानी शिक्षक को कागज की मूल कॉपी की जगह उसकी स्कैन की गई कॉपी स्क्रीन पर उपलब्ध कराई जाती है।
CBSE ने इस सिस्टम को अपनाने के पीछे मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का उद्देश्य रखा है। हालांकि, इस साल OSM के इस्तेमाल के तरीके को लेकर कुछ छात्रों और याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।
OSM में किन गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में OSM सिस्टम लागू करने के दौरान कई तरह की कथित समस्याओं का आरोप लगाया गया। इसमें उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्नों का स्कैन नहीं होना, स्कैन की कॉपी साफ नहीं होना और कुछ उत्तरों या पन्नों का मूल्यांकन नहीं किए जाने जैसी शिकायतें शामिल थीं। याचिका में मूल्यांकन प्रक्रिया और OSM के इस्तेमाल के तरीके को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि वेबसाइट में तकनीकी समस्या के कारण कुछ छात्र तय अवधि में आवेदन नहीं कर सके। इसी आधार पर पोर्टल को एक सप्ताह के लिए फिर से खोलने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
छात्रों के लिए अब क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद CBSE कक्षा 12 के उन छात्रों के लिए दोबारा पुनर्मूल्यांकन या सत्यापन का मौका खुलने की संभावना फिलहाल नहीं है, जो तय समय में आवेदन नहीं कर पाए। हालांकि, OSM से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के स्थायी समाधान की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता अलग मुद्दा है। कोर्ट ने पहले इस संबंध में केंद्र और CBSE से जवाब मांगा था।
CBSE की आधिकारिक परीक्षा सूचनाओं के अनुसार, 2026 की कक्षा 12 परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी लेने और उसके बाद सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी सुविधाओं के लिए अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से फिलहाल यह साफ है कि तय समयसीमा को पार कर चुके छात्रों के लिए केवल OSM में कथित गड़बड़ी के आधार पर पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा खोलने का आदेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही, OSM व्यवस्था में तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत का मुद्दा अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।




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