Edinbox Hindi
FMGE June 2026: Expert Panel Rejects Grace Marks, Finds No Significant Impact on Results

FMGE June 2026: ग्रेस मार्क्स की मांग खारिज, एक्सपर्ट कमेटी ने बताया क्यों नहीं बदलेगा रिजल्ट

FMGE June 2026: Expert Panel Rejects Grace Marks, Finds No Significant Impact on Results

फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) जून 2026 में वीडियो आधारित सवालों और कुछ परीक्षा केंद्रों पर सुविधाओं को लेकर उठे सवालों के बीच उम्मीदवारों को ग्रेस या क्षतिपूर्ति अंक मिलने की उम्मीद को झटका लगा है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की ओर से बनाई गई विशेषज्ञ समिति ने अपनी समीक्षा में कहा है कि उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा कोई ठोस या सांख्यिकीय सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि वीडियो सवालों या परीक्षा केंद्रों की समस्याओं का परिणाम पर महत्वपूर्ण असर पड़ा।

FMGE जून 2026 का परिणाम 7 जुलाई को जारी हुआ था। परीक्षा में 37,448 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें 4,635 उम्मीदवार पास हुए। आधिकारिक परिणाम के अनुसार पास प्रतिशत 12.38 फीसदी रहा।

वीडियो सवालों और परीक्षा केंद्रों की शिकायतों की हुई जांच

FMGE जून 2026 के बाद कुछ उम्मीदवारों ने वीडियो आधारित सवालों के लिए अतिरिक्त या ग्रेस मार्क्स देने की मांग की थी। उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर गर्मी, वेंटिलेशन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं थीं। इन शिकायतों के बाद NBEMS ने एक विशेषज्ञ समिति गठित कर परीक्षा के अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा कराई।

समिति ने प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर, वीडियो आधारित सवालों, परीक्षा केंद्रों की स्थिति, उम्मीदवारों के प्रदर्शन, अलग-अलग प्रयासों के परिणाम और FMGE पर लागू नियमों की समीक्षा की। समिति के अनुसार, जून 2026 की परीक्षा का कुल कठिनाई स्तर पिछले सत्रों के मुकाबले लगभग समान था।

समिति ने यह भी पाया कि सभी 300 सवालों को शामिल करने और 14 वीडियो आधारित सवालों को हटाकर परिणाम का विश्लेषण करने पर पास प्रतिशत में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया। दोनों स्थितियों में यह आंकड़ा करीब 12.8 फीसदी रहा। हालांकि, NBEMS के आधिकारिक परिणाम में कुल पास प्रतिशत 12.38 फीसदी दर्ज है।

ज्यादातर उम्मीदवारों ने पूरा प्रश्नपत्र किया हल

समिति की समीक्षा में परीक्षा पूरी करने वाले उम्मीदवारों के आंकड़ों को भी देखा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिफ्ट-1 में करीब 78 फीसदी और शिफ्ट-2 में 88 फीसदी उम्मीदवारों ने पूरा प्रश्नपत्र हल किया।

समिति ने यह भी कहा कि उम्मीदवारों का वीडियो आधारित सवालों में प्रदर्शन उनके पूरे प्रश्नपत्र के प्रदर्शन की तुलना में बेहतर रहा। इन आंकड़ों के आधार पर समिति को यह साबित करने वाला कोई ठोस आधार नहीं मिला कि वीडियो आधारित सवालों के कारण उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर ऐसा असर पड़ा हो, जिसके लिए ग्रेस मार्क्स दिए जाने चाहिए।

गर्मी और वेंटिलेशन वाली जगहों के परिणाम भी जांचे गए

परीक्षा केंद्रों को लेकर मिली शिकायतों की भी अलग से समीक्षा की गई। खास तौर पर उन केंद्रों के परिणामों का विश्लेषण किया गया, जहां ज्यादा गर्मी या वेंटिलेशन की समस्या की शिकायत सामने आई थी।

समिति के अनुसार, इन केंद्रों के परीक्षा परिणामों में ऐसा कोई बड़ा अंतर नहीं मिला, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि तापमान या केंद्र की स्थिति ने परिणाम को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। इसलिए समिति ने इन समस्याओं के आधार पर भी क्षतिपूर्ति अंक देने की सिफारिश नहीं की।

FMGE में ग्रेस मार्क्स का प्रावधान नहीं

ग्रेस मार्क्स की मांग के सामने एक बड़ी समस्या FMGE के मौजूदा नियम भी हैं। FMGE जून 2026 के आधिकारिक सूचना बुलेटिन में साफ कहा गया है कि परीक्षा में पुनर्मूल्यांकन, दोबारा जांच, दोबारा गणना या ग्रेस मार्क्स देने का प्रावधान नहीं है। ऐसे अनुरोधों पर विचार नहीं किया जाएगा।

विशेषज्ञ समिति ने भी FMGE के क्वालिफाइंग मानकों से जुड़े कानूनी ढांचे का हवाला दिया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के Sanjeev Gupta & Ors. बनाम Union of India & Ors. मामले से जुड़े निर्देश शामिल हैं। समिति के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में क्षतिपूर्ति या ग्रेस अंक देने की गुंजाइश नहीं है।

भविष्य की FMGE परीक्षा में क्या बदल सकता है?

हालांकि समिति ने जून 2026 के परिणाम में बदलाव या उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स देने की सिफारिश नहीं की, लेकिन भविष्य की परीक्षाओं में सुधार के लिए कई सुझाव दिए हैं।

समिति ने मल्टीमीडिया या वीडियो आधारित सवालों के बारे में उम्मीदवारों को पहले से जानकारी देने, परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं को बेहतर बनाने और किसी तकनीकी या दूसरी आपात स्थिति के लिए बेहतर व्यवस्था रखने की सिफारिश की है। उम्मीदवारों को उनके रिकॉर्ड किए गए जवाब और प्राप्त अंकों की जानकारी उपलब्ध कराने से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है।

इसके अलावा, FMGE को साल में कम से कम तीन बार आयोजित करने, परीक्षा शुल्क की समीक्षा करने और कम कठिनाई वाले सवालों का अनुपात बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। समिति ने कम कठिनाई वाले सवालों का हिस्सा करीब 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करने की सिफारिश की है।

उम्मीदवारों की मांग और समिति के निष्कर्ष में अंतर

FMGE जून 2026 को लेकर उम्मीदवारों की मुख्य मांग परीक्षा में सामने आए वीडियो आधारित सवालों और कथित परीक्षा केंद्र समस्याओं के लिए राहत देने की रही है। उम्मीदवारों ने परीक्षा की पारदर्शिता और उत्तरों की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। अगस्त में दिल्ली में उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन भी हुआ।

दूसरी ओर, विशेषज्ञ समिति का निष्कर्ष है कि उपलब्ध आंकड़े जून 2026 के परिणाम को दोबारा बदलने या ग्रेस मार्क्स देने का पर्याप्त आधार नहीं देते। यानी फिलहाल जून 2026 के FMGE रिजल्ट में बदलाव की कोई सिफारिश नहीं की गई है। साथ ही, समिति ने यह माना है कि भविष्य की परीक्षाओं में उम्मीदवारों को बेहतर सुविधाएं और अधिक पारदर्शी व्यवस्था देने की जरूरत है।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed