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IIT Delhi Student Death: External Probe Ordered After M.Sc. Student Rishikesh Kumar's Death

IIT Delhi Student Death: M.Sc. छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद जांच कमेटी, छात्रों के विरोध के बीच उठे कई सवाल

IIT Delhi Student Death: External Probe Ordered After M.Sc. Student Rishikesh Kumar's Death

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) के M.Sc. फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त 2026 को हुई मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध तेज हो गया है। 31 वर्षीय ऋषिकेश की मौत के बाद छात्रों ने स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और छात्र सहायता व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठाई है। पुलिस ने भी मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ऋषिकेश ने जुलाई 2025 में IIT Delhi के फिजिक्स विभाग के M.Sc. कार्यक्रम में दाखिला लिया था। संस्थान के अनुसार, उन्होंने पहले सेमेस्टर में अच्छा प्रदर्शन किया था। बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्होंने पढ़ाई से ब्रेक लिया था।

स्वास्थ्य को लेकर पहले भी जताई गई थी चिंता

IIT Delhi के अनुसार, मार्च 2026 में ऋषिकेश की तबीयत को लेकर उनके साथ रहने वाले छात्रों ने चिंता जताई थी। इसके बाद उन्हें संस्थान के अस्पताल ले जाया गया, जहां काउंसलर और मनोचिकित्सक ने उनका इलाज किया। परिवार की इच्छा पर उन्हें आगे इलाज के लिए एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

संस्थान के मुताबिक, इसके बाद ऋषिकेश के दूसरे सेमेस्टर से हटने के अनुरोध को मंजूरी दी गई और वे माता-पिता के साथ रहने लगे। जुलाई 2026 में IIT Delhi लौटने के बाद उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की गई। संस्थान का कहना है कि डॉक्टरों और काउंसलर ने उन्हें फिर माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी थी। इसके बाद तीसरे सेमेस्टर से उनके नाम वापस लेने का अनुरोध भी मंजूर किया गया।

हालांकि, ऋषिकेश के परिवार ने संस्थान की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके भाई ने आरोप लगाया कि परिवार ने हॉस्टल में रहने की सुविधा और अन्य मदद के लिए संस्थान से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली। परिवार के इन आरोपों की जांच अभी जारी है।

ऋषिकेश की मौत के बाद कैंपस में विरोध

22 अगस्त को ऋषिकेश की मौत के बाद IIT Delhi में छात्रों का विरोध शुरू हुआ। छात्रों ने छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन और कैंडल मार्च किया। विरोध के बीच संस्थान को सोमवार की सभी कक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।

छात्रों की ओर से स्वतंत्र जांच की मांग की गई। कुछ छात्रों ने संस्थान के छात्र कल्याण से जुड़े अधिकारियों के इस्तीफे की मांग भी उठाई। हालांकि, IIT Delhi के निदेशक ने इन मांगों पर फिलहाल सहमति नहीं जताई है।

IIT Delhi ने बनाई बाहरी जांच कमेटी

छात्रों के विरोध के बाद IIT Delhi ने ऋषिकेश की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति बनाने की घोषणा की। शुरुआती समिति में IIT Delhi के पूर्व छात्र और उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार, AIIMS दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और संस्थान के रजिस्ट्रार शामिल थे। समिति को संबंधित रिकॉर्ड, संस्थान की प्रक्रियाओं और छात्र सहायता व्यवस्था की समीक्षा कर रिपोर्ट देने को कहा गया था।

हालांकि, छात्रों ने समिति में अशोक कुमार को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। इसके बाद IIT Delhi प्रशासन ने समिति के गठन में बदलाव करने पर सहमति जताई है। छात्रों से वैकल्पिक नाम सुझाने को कहा गया है।

पुलिस ने भी शुरू की जांच

ऋषिकेश की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी FIR दर्ज की है। पुलिस मामले से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनकी मौत के पीछे कोई एक कारण था। पुलिस जांच और बाहरी समिति की रिपोर्ट से ही घटनाक्रम और उससे जुड़े सवालों की स्थिति ज्यादा साफ हो सकेगी।

संस्थान ने छात्र सहायता व्यवस्था मजबूत करने की बात कही

IIT Delhi ने कहा है कि वह छात्रों की भलाई और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अपनी सहायता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठा रहा है। संस्थान के अनुसार, छात्रों के लिए काउंसलिंग और मनोचिकित्सकीय सहायता उपलब्ध है। संस्थान की Student Affairs व्यवस्था में काउंसलिंग और IIT Delhi अस्पताल जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

ऋषिकेश की मौत के बाद संस्थान ने परिवार की आर्थिक मदद करने और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए बाहरी लोकपाल (Ombudsperson) नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अलावा, ऐसे छात्रों के लिए अतिरिक्त फैकल्टी-स्टूडेंट मेंटर सहायता व्यवस्था बनाने की बात कही गई है जिन्हें माता-पिता की निगरानी में रहने की जरूरत हो।

अब जांच से सामने आएगा कि कहां हुई चूक

ऋषिकेश कुमार की मौत ने IIT Delhi में छात्रों की मानसिक सेहत, हॉस्टल और अकादमिक सहायता तथा शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर संस्थान का कहना है कि ऋषिकेश को इलाज और काउंसलिंग उपलब्ध कराई गई थी और स्वास्थ्य संबंधी सलाह के आधार पर उन्हें माता-पिता की निगरानी में रहने को कहा गया था। दूसरी ओर परिवार और छात्रों ने संस्थान की ओर से मिली सहायता को लेकर सवाल उठाए हैं।

अब बाहरी जांच और पुलिस जांच दोनों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि ऋषिकेश की मौत से पहले क्या परिस्थितियां थीं, संस्थान की ओर से उपलब्ध सहायता का इस्तेमाल किस तरह हुआ और छात्र सहायता व्यवस्था में किसी सुधार की जरूरत थी या नहीं।

 

 

Asmita Sarkar

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