
राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए तीन साल का 12,500 करोड़ रुपये का रोडमैप तैयार किया है। यह फैसला देशभर में चलाए गए ‘School Thik Karo’ अभियान के बाद सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को लेकर बढ़ी चर्चा और राजनीतिक दबाव के बीच लिया गया है।
सरकार की इस योजना का मकसद सरकारी स्कूलों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करना है। इसमें पर्याप्त क्लासरूम और स्कूल भवन से लेकर शौचालय, डिजिटल शिक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया गया है।
इस योजना के तहत 3,587 नए स्कूल भवनों के निर्माण के लिए 2,487.7 करोड़ रुपये और 83,783 नए क्लासरूम बनाने के लिए 8,378.3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बुनियादी सुविधाओं पर खास जोर
राज्य सरकार की योजना में स्कूलों की मरम्मत और जरूरी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए भी बड़ी राशि रखी गई है। इसके तहत 22,589 स्कूलों में जरूरी मरम्मत कार्य के लिए 1,129.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, 13,616 स्कूलों में अलग शौचालयों के निर्माण के लिए 340.4 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार के सामने चुनौती बड़ी है। उसके मुताबिक, राजस्थान में 611 स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। इसके अलावा कई सरकारी स्कूलों में काम करने लायक शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी है।
ऐसे में सरकार का यह तीन साल का रोडमैप सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चली आ रही बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
डिजिटल शिक्षा के लिए भी बड़ा प्लान
सरकार ने स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई है। इसके तहत करीब 9,000 स्मार्ट क्लासरूम और 7,000 आईसीटी लैब तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा छात्रों को करीब 80,000 टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना है।
डिजिटल शिक्षा से जुड़े इस हिस्से के लिए सरकार ने 1,087 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के छात्रों को तकनीक आधारित पढ़ाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
‘School Thik Karo’ अभियान से बढ़ा दबाव
सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच ‘School Thik Karo’ अभियान ने भी इन कमियों को सामने लाने में भूमिका निभाई है। अभियान के जरिए स्कूलों में भवन, शौचालय, दूसरी बुनियादी सुविधाओं, शिक्षक पदों की खाली जगह और फंड से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।
इससे सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार पर जवाब देने और सुविधाओं में सुधार करने का दबाव बढ़ा है। सरकार का नया रोडमैप इसी व्यापक चर्चा के बीच सामने आया है।
कांग्रेस ने उठाए योजना पर सवाल
सरकार की घोषणा के बाद कांग्रेस ने योजना को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने 12,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित खर्च का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस ने योजना के लिए धन की व्यवस्था और इसके वित्तीय ढांचे को लेकर भी चिंता जताई है।
अब इस योजना की सफलता काफी हद तक इसके जमीन पर लागू होने पर निर्भर करेगी। नए स्कूल भवन और क्लासरूम बनाने के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुराने स्कूलों में शौचालय, पानी, डिजिटल सुविधाएं और अन्य जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध हो पाते हैं या नहीं।




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