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NEET UG Protest: Supreme Court Quashes FIRs Against Student Protesters, CJP Withdraws September 5 March 

NEET UG Protest: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ FIR की रद्द, 5 सितंबर का CJP मार्च भी वापस

NEET UG Protest: Supreme Court Quashes FIRs Against Student Protesters, CJP Withdraws September 5 March 

NEET UG Protest: NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के Article 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को बंद करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि इन प्रदर्शनों से जुड़ी FIR की जांच या आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी और उन्हें सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा। यह आदेश दिल्ली के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़ी ऐसी FIR, जिन्हें अदालत के सामने पेश नहीं किया गया है, उन पर भी आगे जांच या कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।

दिल्ली समेत चार राज्यों में दर्ज मामलों पर भी राहत

NEET-UG प्रदर्शन से जुड़े FIR को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र तथा असम की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। चार राज्यों ने कुल 116 FIR को रद्द करने की मांग की थी, जबकि दिल्ली पुलिस ने अपने स्तर पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित FIR को रद्द करने के साथ यह भी निर्देश दिया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए इन प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में नई FIR दर्ज नहीं की जाए।

हालांकि, अदालत ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामले में अलग रुख अपनाया है।

2,873 लोगों के खिलाफ हो सकती है नई FIR

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है, जिनके बारे में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात अदालत के सामने रखी गई थी। ये लोग जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल थे।

अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को आगे की कानूनी कार्रवाई की अनुमति दी है। इसका मतलब यह है कि प्रदर्शन में शामिल हर व्यक्ति को एक जैसी राहत नहीं मिली है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के मामलों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

सुनवाई के दौरान इन लोगों की सूची को लेकर भी सवाल उठाए गए थे, ताकि यह साफ हो सके कि आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी है।

NEET प्रदर्शन में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि सरकार पहले प्रदर्शनकारियों के साथ हुई बातचीत में दिए गए भरोसे पर कायम है।

केंद्र ने NEET-UG 2026 से जुड़े घटनाक्रम के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की नीति तैयार करने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को मुआवजे के लिए एक नीति और व्यवस्था तैयार करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इस व्यवस्था को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लागू करने की दिशा में भी काम किया जाना है।

इससे पहले प्रदर्शनकारी पक्ष की ओर से सरकार के सामने छात्रों के परिवारों के लिए सहायता और मुआवजे का मुद्दा उठाया गया था।

CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना दिल्ली मार्च वापस ले लिया। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत को बताया कि संगठन ने प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया है।

यह मार्च पहले India Gate से Delhi Police Headquarters तक निकाले जाने की योजना थी। संगठन ने यह फैसला केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया। अदालत ने सौरव दास के बयान को रिकॉर्ड पर लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत से समाधान निकालने पर दिया जोर

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत और भरोसे को महत्वपूर्ण बताया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष खुले दिमाग से बातचीत करें और एक-दूसरे पर भरोसा रखें, तो मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

केंद्र की ओर से तुषार मेहता ने भी कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारी पक्ष के बीच हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने संबंधित पक्षों की ओर से दिए गए बयानों को अपने आदेश में दर्ज किया।

Article 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम है?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे सामान्य मामलों में लागू होने वाली मिसाल यानी precedent के रूप में नहीं माना जाएगा।

फैसले से 20 से 25 जुलाई के NEET-UG प्रदर्शनों से जुड़े छात्रों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। साथ ही, 5 सितंबर के प्रस्तावित CJP मार्च के वापस लिए जाने से इस मामले में सरकार और प्रदर्शनकारी पक्ष के बीच आगे बातचीत की संभावना भी बनी है।

हालांकि, 2,873 लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर दी गई कार्रवाई की अनुमति यह साफ करती है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े सभी मामलों को बिना शर्त एक जैसा नहीं माना है।

 

Asmita Sarkar

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