
NEET UG 2027 को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने की तैयारी के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े स्तर पर परीक्षा कराने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। करीब 24 लाख उम्मीदवारों वाली इस परीक्षा को ऑनलाइन कराने के लिए बड़ी संख्या में कंप्यूटर, सुरक्षित परीक्षा केंद्र, निगरानी व्यवस्था और तकनीकी सुविधाओं की जरूरत होगी।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि NEET UG 2027 को CBT मोड में कराने पर अभी अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि परीक्षा के तरीके में बदलाव का फैसला नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा।
इस बीच, रिपोर्टों के मुताबिक NTA और केंद्र सरकार ने संभावित बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित व्यवस्था में NEET UG को एक ही दिन कराने के बजाय कई दिनों और कई शिफ्ट में CBT मोड में आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे लाखों उम्मीदवारों की परीक्षा को सीमित संख्या में कंप्यूटर केंद्रों पर कराया जा सकेगा।
24 लाख छात्रों की परीक्षा के लिए कितने केंद्र चाहिए?
NEET UG देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। मौजूदा व्यवस्था में यह परीक्षा पेन-पेपर मोड में एक दिन में देशभर के हजारों केंद्रों पर आयोजित होती है। 2024 में करीब 24 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी और परीक्षा 4,750 केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
CBT व्यवस्था में इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को एक साथ परीक्षा कराना संभव नहीं होगा। इसी वजह से परीक्षा को 5 से 6 दिनों में अलग-अलग शिफ्ट में कराने का प्रस्ताव सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 500 शहरों में लगभग 1,000 कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। प्रत्येक केंद्र पर एक दिन में करीब 500 उम्मीदवारों की परीक्षा कराने की योजना बताई गई है।
इस हिसाब से एक दिन में करीब 5 लाख उम्मीदवार परीक्षा दे सकते हैं और 5-6 दिनों में पूरी परीक्षा कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम केंद्रों, शहरों, शिफ्ट और परीक्षा कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
NTA के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती
NEET UG को ऑनलाइन कराने के लिए सिर्फ कंप्यूटर उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षा केंद्रों पर मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली की लगातार उपलब्धता, बैकअप पावर, CCTV निगरानी, जैमर, बायोमेट्रिक या पहचान सत्यापन, सुरक्षित सर्वर और अन्य सुरक्षा इंतजाम भी जरूरी होंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित केंद्रों में सरकारी संस्थानों, खासकर केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय को प्राथमिकता दी जा सकती है। कुछ चुनिंदा निजी संस्थानों को भी परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता है।
NTA की अपनी रणनीतिक योजना में भी कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को बड़े स्तर पर लागू करने और तकनीकी रूप से सक्षम परीक्षा केंद्रों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। एजेंसी के अनुसार CBT से बड़े स्तर पर परीक्षाएं कम समय में आयोजित की जा सकती हैं और पेपर लीक तथा परीक्षा के बाद उत्तर भरने जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
अपने परीक्षा केंद्रों पर जोर क्यों?
NEET और दूसरी बड़ी परीक्षाओं में सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी सुधार का अहम हिस्सा बन गई है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार और NTA सरकारी संस्थानों पर आधारित सुरक्षित परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क तैयार करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि हर परीक्षा के लिए अलग-अलग किराये के केंद्रों पर निर्भरता कम हो।
इस तरह के स्थायी या लंबे समय के लिए तैयार किए गए केंद्रों में कंप्यूटर सिस्टम, CCTV, सुरक्षा उपकरण, बैठने की व्यवस्था और दूसरी जरूरी सुविधाएं पहले से उपलब्ध रखी जा सकती हैं। इससे परीक्षा से पहले बड़े पैमाने पर नए केंद्र तैयार करने की जरूरत कम होगी।
हालांकि, करीब 24 लाख उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त कंप्यूटर और सुरक्षित केंद्र तैयार करना अपने आप में बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक काम होगा। इसी वजह से परीक्षा सुधार की मौजूदा चर्चा में फंडिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और केंद्रों की उपलब्धता को अहम मुद्दा माना जा रहा है।
NTA सालभर कराता है कई बड़ी परीक्षाएं
NTA की जिम्मेदारी सिर्फ NEET UG तक सीमित नहीं है। एजेंसी JEE Main, CUET UG, CUET PG, UGC NET, CSIR UGC NET, CMAT समेत कई राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करती है। इनमें से ज्यादातर बड़ी परीक्षाएं पहले से ही कंप्यूटर आधारित मोड में होती हैं।
NTA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एजेंसी CBT के लिए तकनीकी रूप से सक्षम परीक्षा केंद्रों का इस्तेमाल करती है और इसके लिए अलग-अलग स्तर की तकनीकी सेवाओं के टेंडर भी जारी करती है। मौजूदा टेंडर सूची में CBT परीक्षा के संचालन और परीक्षा निगरानी से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।
NEET UG इसलिए अलग चुनौती है क्योंकि इसमें उम्मीदवारों की संख्या बहुत ज्यादा है और अभी तक परीक्षा एक ही दिन पेन-पेपर मोड में होती रही है। इसे CBT में बदलने का मतलब होगा कि NTA को परीक्षा की पूरी व्यवस्था को बड़े स्तर पर नए तरीके से तैयार करना होगा।
चीन की Gaokao से कितना अलग है भारत का मॉडल?
भारत में NTA को पूरे साल अलग-अलग परीक्षाओं का आयोजन करना पड़ता है। इसके उलट चीन की Gaokao मुख्य रूप से विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय परीक्षा है, जिसे सीमित दिनों में आयोजित किया जाता है। हालांकि दोनों परीक्षाओं का आकार बड़ा है, लेकिन उनकी परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मॉडल अलग हैं।
NEET UG में एक ही परीक्षा के लिए देशभर से लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। इसलिए भारत में CBT लागू करने के लिए सिर्फ परीक्षा का तरीका बदलना नहीं, बल्कि केंद्रों, तकनीक, सुरक्षा और प्रशासन की पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना होगा।
नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की भूमिका अहम
NEET समेत राष्ट्रीय परीक्षाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीक, सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासन से जुड़े बदलावों पर काम कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार समिति 2027 परीक्षा चक्र के लिए बदलावों का रोडमैप तैयार कर रही है।
इसीलिए NEET UG 2027 के CBT मोड को लेकर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तैयारी और प्रस्ताव सामने हैं, लेकिन अंतिम व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है। आने वाले समय में टास्क फोर्स की सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद यह साफ होगा कि NEET UG 2027 किस मोड, कितने दिनों और कितने केंद्रों पर आयोजित होगी।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
अगर CBT व्यवस्था लागू होती है तो NEET उम्मीदवारों के लिए परीक्षा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा। उन्हें OMR शीट पर उत्तर भरने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर सवाल हल करने होंगे। परीक्षा कई दिनों और शिफ्ट में होने की स्थिति में परीक्षा प्रक्रिया, शिफ्ट और केंद्र आवंटन से जुड़ी नई व्यवस्था भी लागू होगी।
NTA पहले से CBT परीक्षाओं के लिए मॉक टेस्ट उपलब्ध कराता है, ताकि उम्मीदवार कंप्यूटर आधारित परीक्षा की प्रक्रिया से परिचित हो सकें।
इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है, लेकिन करीब 24 लाख उम्मीदवारों वाली परीक्षा में इसे लागू करना NTA के लिए बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी चुनौती भी होगी। अब नजर इस बात पर है कि नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की अंतिम सिफारिशें क्या होती हैं और सरकार NEET UG 2027 की परीक्षा व्यवस्था को किस रूप में मंजूरी देती है।




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