Edinbox Hindi
RGPV Reorganisation: Madhya Pradesh Approves Three Technology and Skill Universities in Bhopal, Ujjain and Jabalpur

RGPV अब एक नहीं, तीन यूनिवर्सिटी में बंटेगा, राजीव गांधी का नाम भी हटेगा; MP कैबिनेट का बड़ा फैसला

RGPV Reorganisation: Madhya Pradesh Approves Three Technology and Skill Universities in Bhopal, Ujjain and Jabalpur

RGPV Reorganisation: मध्यप्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई। अब मौजूदा RGPV को तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में विकसित किया जाएगा। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में होंगे।

इस फैसले के साथ RGPV के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी हटाया जाएगा। मौजूदा भोपाल विश्वविद्यालय को मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।

585 संस्थानों और 3.83 लाख से ज्यादा छात्रों पर पड़ेगा असर

RGPV मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में से एक है। वर्तमान में इसके तहत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के तीन हिस्सों में पुनर्गठन का असर बड़ी संख्या में छात्रों, कॉलेजों और शिक्षकों पर पड़ेगा।

सरकार ने तकनीकी संस्थानों को उनके भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर तीन प्रस्तावित विश्वविद्यालयों के बीच बांटने का फैसला किया है। इसके तहत भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग के संस्थान मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के अधीन आएंगे।

वहीं, उज्जैन और इंदौर संभाग के तकनीकी संस्थानों को मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय से जोड़ा जाएगा। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के संस्थान महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के अंतर्गत होंगे।

तीनों विश्वविद्यालयों के लिए अलग कानून बनेगा

इस फैसले की अहम बात यह है कि तीनों विश्वविद्यालय सिर्फ RGPV की अलग-अलग शाखाओं के तौर पर काम नहीं करेंगे। इनके संचालन के लिए अलग-अलग अधिनियम (Acts) बनाए जाएंगे। यानी नई व्यवस्था लागू होने के बाद तीनों विश्वविद्यालयों का अपना अलग कानूनी और प्रशासनिक ढांचा होगा।

सरकार ने इन विश्वविद्यालयों की स्थापना और आगे की प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक सशक्त समिति बनाने को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

राज्य सरकार के मुताबिक RGPV के पुनर्गठन का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को मजबूत करना, क्षेत्रीय संतुलन बेहतर करना और प्रशासनिक व्यवस्था को आसान बनाना है। अभी बड़ी संख्या में तकनीकी संस्थान एक ही विश्वविद्यालय से जुड़े हैं। नई व्यवस्था में इन्हें अलग-अलग क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों से जोड़ने की योजना है।

सरकार का मानना है कि क्षेत्र के हिसाब से विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी तय होने से छात्रों और कॉलेजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं मिल सकती हैं। साथ ही, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत के मुताबिक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल: पुरानी पढ़ाई और डिग्री का क्या होगा?

RGPV से जुड़े लाखों छात्रों के लिए सबसे अहम सवाल अब इस नई व्यवस्था के लागू होने को लेकर है। खास तौर पर मौजूदा छात्रों के एग्जाम, रिजल्ट, डिग्री, माइग्रेशन और कॉलेज एफिलिएशन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।

अभी कैबिनेट ने तीन विश्वविद्यालयों के गठन को मंजूरी दी है, लेकिन इनके लिए अलग-अलग कानून बनने और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था तैयार होने की प्रक्रिया आगे चलेगी। इसलिए मौजूदा छात्रों पर नई व्यवस्था कब और किस तरह लागू होगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग और नए विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रक्रिया के दौरान सामने आएगी।

छात्रों और कॉलेजों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था में सिलेबस, परीक्षा कैलेंडर, रिजल्ट जारी करने और एफिलिएशन से जुड़े काम किस तरह बांटे जाएंगे। इतनी बड़ी संख्या में संस्थानों और विद्यार्थियों के कारण बदलाव को चरणबद्ध और स्पष्ट तरीके से लागू करना जरूरी होगा।

राजीव गांधी का नाम हटाने पर राजनीतिक विवाद

RGPV के पुनर्गठन के साथ विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाने के फैसले ने राजनीतिक बहस भी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए विश्वविद्यालय का पुनर्गठन किया जा सकता है, लेकिन नाम बदलने का फैसला अलग राजनीतिक उद्देश्य की ओर इशारा करता है।

कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया है कि राजीव गांधी के कार्यकाल को देश में कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार से जोड़कर देखा जाता है। पार्टी ने नाम बदलने के फैसले का विरोध किया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार इस फैसले को तकनीकी शिक्षा के विस्तार, क्षेत्रीय संतुलन और प्रशासनिक सुधार से जोड़ रही है।

भोपाल से बाहर भी मजबूत होगा तकनीकी शिक्षा का नेटवर्क

RGPV को तीन विश्वविद्यालयों में बांटने की योजना का सबसे बड़ा असर मध्यप्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा के प्रशासन पर दिखाई दे सकता है। अभी भोपाल स्थित विश्वविद्यालय के दायरे में राज्य के बड़े हिस्से के तकनीकी संस्थान आते हैं। नई व्यवस्था में भोपाल, उज्जैन और जबलपुर को तीन अलग क्षेत्रीय केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

इससे मालवा और महाकौशल क्षेत्र के तकनीकी संस्थानों को अपने क्षेत्र में स्थित विश्वविद्यालय से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा तभी सामने आएगा जब नई व्यवस्था में प्रशासनिक प्रक्रिया आसान हो और छात्रों को परीक्षा, रिजल्ट, डिग्री और कॉलेज से जुड़े कामों में परेशानी न हो।

कब लागू होगी नई व्यवस्था?

फिलहाल कैबिनेट ने RGPV के पुनर्गठन और तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। अब तीनों विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग कानून बनाने, प्रशासनिक ढांचा तैयार करने और संस्थानों के क्षेत्रीय बंटवारे को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए सशक्त समिति को भी मंजूरी दी है।

इसलिए छात्रों के लिए अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि RGPV का पुनर्गठन कैबिनेट से मंजूर हो चुका है, लेकिन नई तीन-विश्वविद्यालय व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया बाकी है।

करीब 585 संस्थानों और 3.83 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों से जुड़ी इस व्यवस्था में बदलाव मध्यप्रदेश की तकनीकी शिक्षा के लिए बड़ा कदम है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार नई व्यवस्था को कितनी स्पष्टता और आसानी से लागू करती है और मौजूदा छात्रों के अकादमिक रिकॉर्ड, परीक्षाओं और डिग्री से जुड़े मामलों को किस तरह संभालती है।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed