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Jharkhand Politics: Three Education Ministers Died in 3.5 Years, A Tragic Coincidence Draws Attention

झारखंड में साढ़े तीन साल में तीन शिक्षा मंत्रियों का निधन, दुखद संयोग ने खींचा ध्यान

Jharkhand Politics: Three Education Ministers Died in 3.5 Years, A Tragic Coincidence Draws Attention

झारखंड की राजनीति में पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान एक ऐसा दुखद संयोग सामने आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों का ध्यान खींचा है। इस अवधि में शिक्षा विभाग से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके तीन मंत्रियों का निधन हो गया। इनमें जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं।

तीनों नेताओं की मौत की परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं और फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे इनके निधन के बीच किसी तरह का संबंध या एक जैसी वजह साबित होती हो। ऐसे में इस घटनाक्रम को केवल एक दुखद संयोग के तौर पर देखा जा रहा है।

सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन

झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को निधन हो गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें गिरिडीह के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें हृदयाघात आया था और रात करीब 2 बजे अस्पताल लाया गया था, जहां करीब 4 बजे उनका निधन हुआ।

सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह से विधायक थे और राज्य सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ नगर विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा खेल एवं युवा मामलों जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो ने गहरा दुख जताया है।

उनके अचानक निधन से झारखंड की राजनीति में शोक की लहर है। इसके साथ ही लोगों का ध्यान पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले दो अन्य मंत्रियों के निधन की ओर भी गया है।

जगरनाथ महतो का बीमारी के बाद निधन

सुदिव्य कुमार सोनू से पहले जगरनाथ महतो झारखंड सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। उनका 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के अस्पताल में निधन हुआ था। वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था और नवंबर 2020 में उनका फेफड़ा प्रत्यारोपण भी किया गया था। बाद में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उन्हें चेन्नई ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हुई।

उनके निधन के बाद झारखंड सरकार ने दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया था। जगरनाथ महतो के निधन से राज्य की राजनीति और झामुमो को बड़ा झटका लगा था।

रामदास सोरेन की मौत भी रही अचानक

जगरनाथ महतो के बाद रामदास सोरेन ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली। 15 अगस्त 2025 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले 2 अगस्त को वह जमशेदपुर स्थित अपने आवास के बाथरूम में गिर गए थे। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और बाद में उन्हें इलाज के लिए दिल्ली लाया गया था।

कुछ रिपोर्टों में उनके ब्रेन हेमरेज की भी जानकारी दी गई थी। करीब दो सप्ताह तक इलाज के बाद उनकी स्थिति गंभीर बनी रही और अंततः उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद झारखंड सरकार और राजनीतिक दलों में शोक की लहर दौड़ गई थी।

तीन मौतें, लेकिन परिस्थितियां अलग

जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू तीनों झारखंड की राजनीति के महत्वपूर्ण नेता रहे। तीनों ने अलग-अलग समय में शिक्षा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाली और पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ। यही वजह है कि साढ़े तीन साल के भीतर तीन ऐसे नेताओं की मौत का घटनाक्रम अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी तीनों मामलों को एक-दूसरे से जोड़ने का आधार नहीं देती। जगरनाथ महतो लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, रामदास सोरेन की हालत गिरने के बाद गंभीर हुई थी, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद हृदयाघात से मौत की जानकारी सामने आई है।

इसलिए इन घटनाओं को लेकर किसी तरह की अटकल लगाने के बजाय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में हुई दुखद मौतों के रूप में देखना ही उचित है। इतना जरूर है कि कम समय में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन झारखंड की राजनीति के लिए एक असामान्य और बेहद दुखद संयोग बन गया है।

 

Asmita Sarkar

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