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NEET के हाई कटऑफ से इस बार MBBS एडमिशन पर पड़ सकते हैं ये बड़े असर

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की गयी NEET UG 2024 परीक्षा के  परिणामों को लेकर इन दिनों चर्चाओं का दौर जारी है। चर्चाएं भी कई किस्म कीं। पेपर लीक, रिजल्ट में गड़बड़ी और परीक्षा रद्द होने की आशंका से लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस पर संभावित रुख तक की। लेकिन इन सबके बीच अप्रत्याशित तौर पर इस बार NEET Cut Off 2024 का काफी ज्यादा होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कहें तो इसे लेकर कई तरह की चिंताएं जताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि नीट परीक्षा का हाई कटऑफ इस साल होने वाले Medical Admissions पर बड़ा असर डालेगा। 

गौरतलब है कि इस बार 67 छात्र तो इस परीक्षा में अखिल भारतीय रैंकिंग-1 हासिल कर टॉप पर हैं। इन सभी के कुल 720 में से 720 नंबर आये हैं। इसके अलावा भी बहुत छात्रों को इस बार 700 से ज़्यादा मार्क्स मिले हैं। ऐसे में इसके इस साल एमबीबीएस समेत अन्य कोर्सेस में एडमिशन पर बड़ा असर पड़ने के बात कही जा रही है। आखिर नीट परीक्षा का हाई कटऑफ कैसी परिस्थितियों को जन्म दे सकता है,  क्या बदलाव देखे जा सकते हैं एमबीबीएस समेत अन्य कोर्सेस में एडमिशन पर, आइये यहाँ हम समझने की कोशिश करते हैं :  

1. मनचाहे संस्थानों में दाखिला होगा मुश्किल  
नीट 2024 कट-ऑफ ज्यादा होने से देश के नामी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धा होगी। यानी पहले जिन्हें अच्छे कॉलेज में आसानी से दाखिला मिल जाता था, उन्हें भी अब अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। प्रतिस्पर्धा ज्यादा है और मेडिकल की सीटें कम। दाखिला प्रक्रिया और भी जटिल और तनावपूर्ण हो जाएगी।

2. डीम्ड और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की बढ़ेगी मांग  
कट-ऑफ ज्यादा होने से प्राइवेट मेडिकल कॉलेज  और डीम्ड यूनिवर्सिटीज में सीटों की मांग भी बढ़ जाएगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मुश्किल होगा। इससे ये प्राइवेट और डीम्ड कॉलेज दाखिला प्रक्रिया में ज्यादा सख्ती बरत सकते हैं। अपने कट-ऑफ या फीस बढ़ा सकते हैं।

3. विदेश में पढ़ने का छात्र चुन सकते हैं विकल्प 
नीट कट-ऑफ ज्यादा होने की वजह से कई छात्रों को Medical Admission 2024 की रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। जो कट-ऑफ के थोड़े ही नीचे हैं, वो शायद तैयारी करने और अगले साल अच्छे अंक लाने के लिए एक साल का गैप लेने के बारे में सोच सकते हैं। कुछ विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई के ऑप्शन भी देख सकते हैं। इस बदलाव से उन देशों में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ सकती है जो किफायती हैं और मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री देने के लिए जाने जाते हैं। 

4. दूसरे वैकल्पिक कोर्सेस पर जाएगा ध्यान 
एमबीबीएस सीटों की कमी और कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए स्टूडेंट्स अब वैकल्पिक चिकित्सा क्षेत्रों के बारे सोचना शुरू कर सकते हैं। फिजियोथेरेपी, फार्मेसी, डेंटिस्ट्री (BDS), वेटनरी साइंसेज (VVSc) और अन्य मेडिकल कोर्सेस में आवेदन बढ़ सकते हैं। जो डॉक्टर बनना चाहते हैं लेकिन उन्हें एमबीबीएस सीट नहीं मिलती, उन्हें ये क्षेत्र हेल्थ सर्विसेस में अच्छे करियर ऑप्शन देते हैं। 

5. कोचिंग इंस्टीट्यूट्स पर बढ़ेगी निर्भरता 
नीट परीक्षा के हाई कटऑफ को देखते हुए छात्र ज्यादा से ज्यादा स्कोर करने के लिए कोचिंग संस्थानों पर और डिपेंडेंट हो सकते हैं। यानी नीट कोचिंग क्लासेस में छात्रों की संख्या बढ़ सकती है। 

Asmita Sarkar

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