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BTech Civil Engineering in Hindi: SGSITS Indore Launches Hindi-Medium Course with ₹2 Lakh Incentive

मध्य प्रदेश में अब हिंदी में होगी BTech Civil Engineering की पढ़ाई, छात्रों को मिलेंगे ₹2 लाख

BTech Civil Engineering in Hindi: SGSITS Indore Launches Hindi-Medium Course with ₹2 Lakh Incentive

मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए इंजीनियरिंग की राह अब थोड़ी आसान होने जा रही है। इंदौर के श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से BTech Civil Engineering का हिंदी माध्यम कार्यक्रम शुरू किया है। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026-27 से B.Tech Civil (Hindi) शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

इस विशेष बैच में 30 सीटें रखी गई हैं और अधिकारियों के मुताबिक करीब 20 छात्रों ने दाखिला ले लिया है। इस कार्यक्रम में पढ़ने वाले पात्र छात्रों को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अंतिम वर्ष में ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन राशि भी मिल सकती है।

यह पहल खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने 12वीं तक हिंदी माध्यम से पढ़ाई की है और इंजीनियरिंग के तकनीकी विषयों को अंग्रेजी में समझने में परेशानी महसूस करते हैं।

अंग्रेजी की वजह से पढ़ाई में आने वाली परेशानी होगी कम

इंजीनियरिंग के ज्यादातर पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री लंबे समय से अंग्रेजी में उपलब्ध रही है। ऐसे में हिंदी माध्यम से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को कॉलेज पहुंचने के बाद एक साथ दो चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें एक तरफ इंजीनियरिंग के कठिन कॉन्सेप्ट समझने होते हैं और दूसरी तरफ तकनीकी अंग्रेजी से भी तालमेल बैठाना पड़ता है।

SGSITS के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख सुनील अजमेरा के अनुसार, संस्थान ने देखा कि हिंदी माध्यम से आने वाले कई छात्रों को अंग्रेजी में इंजीनियरिंग विषय पढ़ाए जाने पर समझने में परेशानी होती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए हिंदी माध्यम में BTech शुरू करने की तैयारी की गई।

संस्थान ने इसके लिए हिंदी में तकनीकी अध्ययन सामग्री तैयार करने और शिक्षकों को हिंदी माध्यम से पढ़ाने के लिए तैयार करने पर भी काम किया है। हालांकि, छात्रों को अंग्रेजी से पूरी तरह अलग नहीं किया जाएगा। उन्हें जरूरी English skills भी सिखाई जाएंगी, ताकि आगे नौकरी और इंडस्ट्री में काम करते समय भाषा उनके लिए बाधा न बने।

हिंदी में पढ़ाई के साथ अंग्रेजी की भी तैयारी

इस कार्यक्रम का मकसद केवल इंजीनियरिंग की पढ़ाई को हिंदी में बदलना नहीं है। छात्रों को अपनी भाषा में विषयों को समझने का मौका देने के साथ उन्हें उस अंग्रेजी की जानकारी भी दी जाएगी, जिसकी जरूरत इंजीनियरिंग की नौकरी और इंडस्ट्री में पड़ती है।

यानी छात्र कॉनसेप्ट हिंदी में आसानी से समझ सकेंगे, जबकि जरूरी तकनीकी अंग्रेजी और प्रोफेशनल स्किल्स भी सीखेंगे। इससे हिंदी माध्यम से आने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई और रोजगार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

छात्रों को अंतिम वर्ष में ₹2 लाख तक की मदद

इस कार्यक्रम की एक खास बात मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन राशि है। अधिकारियों के अनुसार हिंदी माध्यम के इस कार्यक्रम में दाखिला लेने वाले छात्रों को अंतिम वर्ष में यह प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके लिए संबंधित पात्रता और सरकारी नियम लागू होंगे।

इससे उन छात्रों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है जो आर्थिक कारणों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई को लेकर असमंजस में रहते हैं।

AICTE पहले से भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा पर कर रहा है काम

हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उस सोच से जुड़ी है, जिसमें छात्रों को भारतीय भाषाओं में शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा की शुरुआत अब पहली बार हुई है। AICTE पहले से ही हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। AICTE से जुड़े दस्तावेजों में SWAYAM के इंजीनियरिंग और अन्य पाठ्यक्रमों को हिंदी के साथ 11 अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख है।

SGSITS की पहल इसी बड़े बदलाव को मध्य प्रदेश के स्तर पर आगे बढ़ाती है। खास बात यह है कि यहां एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान ने BTech Civil Engineering के लिए अलग हिंदी माध्यम बैच शुरू किया है।

30 सीटों से हुई शुरुआत

SGSITS ने इस विशेष हिंदी माध्यम कार्यक्रम के लिए 30 सीटें तय की हैं। शुरुआती बैच में करीब 20 छात्रों के दाखिले की जानकारी सामने आई है।

संस्थान की वेबसाइट के मुताबिक 2026-27 से B.Tech Civil (Hindi) के अलावा B.Des और B.Tech Robotics and AI जैसे नए कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।

हिंदी माध्यम Civil Engineering की शुरुआत फिलहाल सीमित सीटों के साथ की गई है। अगर छात्रों का अनुभव और कार्यक्रम का परिणाम अच्छा रहता है, तो भविष्य में इसे दूसरे इंजीनियरिंग विषयों तक बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

गांव-कस्बों के छात्रों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में छात्र सरकारी और हिंदी माध्यम के स्कूलों से पढ़कर इंजीनियरिंग में प्रवेश लेते हैं। उनके लिए अंग्रेजी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि कई बार तकनीकी शिक्षा की अतिरिक्त चुनौती बन जाती है।

ऐसे में अगर छात्र अपनी मजबूत भाषा में पहले विषय को समझ सके और उसके साथ जरूरी अंग्रेजी भी सीख सके, तो इंजीनियरिंग शिक्षा तक उसकी पहुंच बेहतर हो सकती है। SGSITS का यह प्रयोग इसी चुनौती को दूर करने की कोशिश है।

आने वाले समय में इस कार्यक्रम की सफलता का आकलन छात्रों के प्रदर्शन, पढ़ाई पूरी करने की दर, आगे की नौकरी और इंडस्ट्री में उनकी स्थिति से होगा। फिलहाल 30 सीटों से शुरू हुई यह पहल मध्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को छात्रों की भाषा के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

 

Asmita Sarkar

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