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Government School Teachers in India 2025-26: Over 51 Lakh Teachers, Uttar Pradesh Leads

सरकारी स्कूलों में 51 लाख से ज्यादा शिक्षक, यूपी सबसे आगे; जानें किस राज्य में कितने शिक्षक

Government School Teachers in India 2025-26: Over 51 Lakh Teachers, Uttar Pradesh Leads

देश के सरकारी स्कूलों में 51 लाख से ज्यादा शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय की ओर से लोकसभा में साझा किए गए UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर के सरकारी स्कूलों में कुल 51,34,623 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिक्षक उत्तर प्रदेश में हैं। इसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान का स्थान है।

शिक्षक दिवस के मौके पर सामने आए ये आंकड़े देश की सरकारी स्कूल व्यवस्था में शिक्षकों की स्थिति की एक तस्वीर पेश करते हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को शिक्षक पदों की उपलब्धता या कमी का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार के पास देशभर में स्वीकृत और खाली शिक्षक पदों का कोई एक केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं है। इनका रिकॉर्ड संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के पास रहता है।

सरकारी स्कूलों में 51.34 लाख शिक्षक

UDISE+ 2025-26 के अनुसार, सरकारी स्कूलों में कुल 51,34,623 शिक्षक कार्यरत हैं। 2024-25 में यह संख्या 51,49,771 थी, जबकि 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 50,37,671 शिक्षक दर्ज किए गए थे। यानी 2025-26 में पिछले शैक्षणिक वर्ष की तुलना में सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या करीब 15 हजार कम हुई है।

शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर भी शिक्षकों की संख्या अलग है। 2025-26 में सरकारी स्कूलों में फाउंडेशनल और प्रिपरेटरी स्तर को मिलाकर 17,54,291, मिडिल स्तर पर 15,32,001 और सेकेंडरी स्तर पर 18,48,331 शिक्षक दर्ज किए गए।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सरकारी शिक्षक

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या के मामले में सबसे आगे है। 2025-26 में राज्य के सरकारी स्कूलों में 6,27,124 शिक्षक कार्यरत थे।

इसके बाद बिहार में 5,36,061, पश्चिम बंगाल में 4,48,113 और राजस्थान में 4,41,070 शिक्षक कार्यरत थे। मध्य प्रदेश में 3,99,970 सरकारी शिक्षक दर्ज किए गए।

इसके अलावा महाराष्ट्र में 2,23,687, तमिलनाडु में 2,21,451, असम में 2,16,716, ओडिशा में 2,13,165 और कर्नाटक में 1,93,644 शिक्षक सरकारी स्कूलों में कार्यरत थे।

छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संख्या कम

बड़े राज्यों की तुलना में छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सरकारी शिक्षकों की संख्या स्वाभाविक रूप से कम है। 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 83,384, केरल में 82,601, पंजाब में 1,22,813 और झारखंड में 1,16,372 शिक्षक कार्यरत थे।

राज्यों में गोवा में 3,805 शिक्षक दर्ज किए गए, जो सबसे कम संख्या है। वहीं केंद्रशासित प्रदेशों में लक्षद्वीप में सिर्फ 729 शिक्षक कार्यरत थे। जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों में 91,569 शिक्षक दर्ज किए गए।

शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेदारी राज्यों की

केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, उनकी सेवा शर्तें और तैनाती मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसलिए देशभर में कितने शिक्षक पद स्वीकृत हैं और इनमें से कितने खाली हैं, इसका कोई एक केंद्रीय रिकॉर्ड शिक्षा मंत्रालय के पास नहीं है।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को खाली पदों को पारदर्शी और मेरिट आधारित तरीके से भरने की सलाह देती है। इसके साथ ही समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों का उचित अनुपात बनाए रखने में मदद मिल सके।

छात्र-शिक्षक अनुपात पर भी सरकार का जोर

सरकार के अनुसार, UDISE+ 2025-26 में देश का छात्र-शिक्षक अनुपात फाउंडेशनल स्तर पर 10:1, प्रिपरेटरी स्तर पर 12:1, मिडिल स्तर पर 17:1 और सेकेंडरी स्तर पर 21:1 रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सामान्य तौर पर स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 से कम रखने पर जोर दिया गया है।

इस लिहाज से 51 लाख से ज्यादा सरकारी शिक्षक देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। हालांकि, सिर्फ कुल शिक्षकों की संख्या से यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी राज्य या जिले में शिक्षकों की कमी है या नहीं। इसके लिए स्कूल स्तर पर छात्रों की संख्या, विषयवार जरूरत, स्वीकृत पद और वास्तविक रिक्तियों को साथ में देखना जरूरी है।

 

Asmita Sarkar

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