
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) ने छात्रों तक शैक्षणिक जानकारी पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर बनाए जाने वाले क्लास और बैच ग्रुप को लेकर अपनी व्यवस्था फिर स्पष्ट की है। विश्वविद्यालय ने छात्रों को अनौपचारिक क्लास ग्रुप से दूरी बनाने की सलाह दी है। इसके साथ ही हर क्लास या बैच के आधिकारिक ग्रुप में विश्वविद्यालय की ओर से नामित शिक्षक को शामिल करना जरूरी किया गया है।
विश्वविद्यालय के निर्देश के मुताबिक, पढ़ाई, कक्षाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और अन्य जरूरी अकादमिक जानकारी छात्रों तक आधिकारिक ग्रुप के माध्यम से पहुंचाई जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को सही और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराना तथा अनधिकृत ग्रुप में गलत या अनुचित सामग्री के प्रसार को रोकना है।
हर क्लास के लिए होगा आधिकारिक ग्रुप
नई व्यवस्था के तहत संबंधित क्लास या बैच के लिए एक आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप बनाया जाएगा। इसमें क्लास प्रतिनिधि एडमिन की भूमिका निभाएगा, जबकि विश्वविद्यालय की ओर से नामित फैकल्टी सदस्य भी ग्रुप का हिस्सा होगा।
शिक्षक की मौजूदगी का उद्देश्य केवल सूचनाएं साझा करना नहीं, बल्कि ग्रुप में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना भी है। विश्वविद्यालय चाहता है कि इन ग्रुप का इस्तेमाल मुख्य रूप से क्लास, पढ़ाई, असाइनमेंट, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए किया जाए।
JMI की आधिकारिक वेबसाइट पर विश्वविद्यालय छात्रों के लिए अलग-अलग अकादमिक और प्रशासनिक सूचनाएं भी जारी करता है। विश्वविद्यालय में 10 फैकल्टी, 44 विभाग और 30 सेंटर हैं, इसलिए छात्रों तक सही सूचना पहुंचाने के लिए आधिकारिक संचार व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
अनौपचारिक ग्रुप से क्यों बनाई जा रही दूरी?
विश्वविद्यालय के अनुसार, छात्रों की ओर से बनाए गए कुछ अनौपचारिक सोशल मीडिया ग्रुप में अकादमिक बातचीत के अलावा दूसरी गतिविधियां भी होने की शिकायतें सामने आई थीं। कुछ मामलों में आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री साझा किए जाने की बात भी सामने आई।
इसी वजह से विश्वविद्यालय ने छात्रों को ऐसे अनौपचारिक ग्रुप से दूरी बनाने और शैक्षणिक जानकारी के लिए आधिकारिक ग्रुप का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
यह कदम ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है जब सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय के नाम से फर्जी सूचनाएं प्रसारित होने के मामले सामने आते रहे हैं। फरवरी 2026 में JMI ने सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी नोटिफिकेशन को लेकर स्पष्ट किया था कि वह विश्वविद्यालय की ओर से जारी नहीं किया गया था और मामले में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
डीन और विभागाध्यक्षों को भी जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय ने डीन, विभागाध्यक्षों और सेंटर डायरेक्टर्स से कहा है कि वे अपनी संबंधित कक्षाओं और बैच के लिए आधिकारिक ग्रुप बनवाना सुनिश्चित करें। इन ग्रुप में विश्वविद्यालय की ओर से नामित शिक्षक को भी जोड़ा जाएगा।
इस व्यवस्था से छात्रों को पढ़ाई और विश्वविद्यालय से जुड़ी जरूरी जानकारी के लिए अलग-अलग अनौपचारिक ग्रुप पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी। साथ ही छात्रों को यह भी पता रहेगा कि किस ग्रुप में मिलने वाली सूचना विश्वविद्यालय की ओर से अधिकृत है।
सितंबर 2025 में भी जारी हुए थे निर्देश
JMI की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आधिकारिक क्लास ग्रुप और उसमें शिक्षक की मौजूदगी से जुड़ी व्यवस्था पूरी तरह नई नहीं है। विश्वविद्यालय ने सितंबर 2025 में भी इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। अब उसी व्यवस्था को दोबारा स्पष्ट किया गया है।
पिछले निर्देशों के पीछे भी छात्रों द्वारा बनाए गए कुछ अनौपचारिक सोशल मीडिया ग्रुप में अकादमिक गतिविधियों के अलावा अन्य तरह की सामग्री और बातचीत होने की शिकायतें वजह बनी थीं।
छात्रों को क्या करना चाहिए?
जामिया के छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे क्लास और पढ़ाई से जुड़ी जानकारी के लिए अपने आधिकारिक क्लास ग्रुप और विश्वविद्यालय के अधिकृत सूचना माध्यमों पर भरोसा करें। किसी सोशल मीडिया ग्रुप में विश्वविद्यालय के नाम से कोई सूचना मिलने पर उसे आधिकारिक स्रोत से सत्यापित करना बेहतर होगा।
JMI अपनी वेबसाइट पर नोटिस और सर्कुलर के जरिए छात्रों को विभिन्न अकादमिक और प्रशासनिक जानकारियां उपलब्ध कराता है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 में भी प्रवेश, परीक्षा, अकादमिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों से संबंधित लगातार सूचनाएं प्रकाशित की जा रही हैं।




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