
पिछले दिनों आरओ (RO) और एआरओ (ARO) की प्रारंभिक परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी यूपीपीएससी परीक्षाओं में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। आयोग ने यह फैसला पेपर लीक की समस्याओं से निपटने के लिए लिया है। कुछ ऐसे ठोस कदम उठाने की पहल की जा रही है जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
बताया जा रहा है कि आयोग ने अब भर्तियों के लिए होने वाली लिखित परीक्षाएं किसी भी वित्तविहीन स्कूलों में नहीं कराये जाने का फैसला किया है। गौरतलब है कि जांच में आरओ- एआरओ की परीक्षा के पेपर लीक होने में वित्तविहीन स्कूलों की मिलीभगत भी सामने आई है। लिहाजा आयोग ने फैसला किया है कि वह सरकार से इन स्कूलों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए केंद्र न बनाने की सिफारिश करेगा। इसके अलावा भी परीक्षाओं में कई बड़े बदलाव किये जाएंगे। इन बदलावों का ऐलान जांच रिपोर्ट आने के बाद किये जाने की उम्मीद है।
बता दें कि पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल एसटीएफ कर रहा है। अभी उसने अपनी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है। सम्भावना जताई जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में वह अपनी पूरी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। आयोग इस रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है। रिपोर्ट के बाद कई जरूरी निर्णय लिए जाएंगे। पेपर लीक की घटना होने के बाद से ही आयोग में कई जरूरी प्वाइंट्स पर विचार चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अब परीक्षा के लिए आयोग 1 महीने पहले ही केंद्रों की लिस्ट जिलों से मांग लेगा। इसमें आयोग राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों को ही केंद्र बनाएगा। वहीं, बाहर से आने वाले उम्मीदवारों की सहूलियत का ध्यान रखते हुए आयोग जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर के अंदर ही केंद्र बनाएगा। साथ ही प्रश्नपत्रों को सेक्टर मजिस्ट्रेट के सामने ही खोला जाएगा। अभी वर्तमान में एक सेक्टर मजिस्ट्रेट 4-5 केंद्रों के प्रश्नपत्र के पैकेट पहुंचाते हैं। किसी परीक्षा के प्रश्नपत्रों को अब अलग-अलग दो प्रेस में छपवाने की तैयारी है। साथ ही यूपी बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा केंद्रों और कक्षों की निगरानी सीसीटीवी से कराये जाने का भी फैसला किया जा सकता है। ओएमआर शीट को भी अब परीक्षा कक्ष में ही सील किया जाएगा ताकि उससे बाद में छेड़छाड़ का कोई अंदेशा न रहे।




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