
अभी हाल ही में एक खबर आयी थी कि काफी संख्या में भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (IIT) बॉम्बे के छात्रों को पिछले दो वर्षों से प्लेसमेंट के मामले में केवल निराशा ही हाथ लग रही है। कहा गया था कि आईआईटी बॉम्बे में इस साल प्लेसमेंट के लिए रजिस्टर करने वाले 35.8 प्रतिशत छात्रों को अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली है। देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों में से एक आईआईटी बॉम्बे का यह हाल वाकई में चिंताजनक है। और अब शैक्षणिक पत्रिका ‘करियर्स 360’ के संस्थापक, चार्टड एकाउंटेंट और निवेश बैंकर महेश्वर पेरी ने भी कहा है कि देश के सर्वोत्कृष्ट टेक्नालॉजी संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा है कि भारत के सबसे अच्छे संस्थानों में प्लेसमेंट कठिन होता जा रहा है। करियर्स 360 की स्टडी में सामने आया है कि प्लेसमेंट घट रहे हैं, औसत सैलरी में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है और कई ऑफर रद्द हुए हैं।
इन ख़बरों को सिरे से नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि रोजगार प्रदान करने के मामले में जब आईआईटी जैसे संस्थान के प्रदर्शन में भी ऐसी गिरावट दर्ज हो रही है तो दूसरों की क्या हालत होगी। एनआईटी दिल्ली की ही बात करें तो इस साल अब तक केवल 65 प्रतिशत छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है और औसत सैलरी भी 14-15 लाख रुपये सालाना हो गई है। उच्चतम पैकेज में भी गिरावट आयी है। दुर्भाग्य कि भर्ती करने वाली कई कंपनियां ऑफर भी रद्द कर रही हैं। एनआईटी दिल्ली के कम्प्यूटर साइंस के 5 छात्रों का 21 लाख के पैकेज पर प्लेसमेंट हुआ था, जिसे बाद में कंपनी ने रद्द कर दिया। कुछ यही हाल देश के अन्य एनआईटी संस्थानों का भी है।
एनआईटी पुदुचेरी में भी मार्च तक 123 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ जबकि पिछले साल यहां के कुल 180 छात्रों को नौकरियां मिली थीं। इस साल कैंपस में आने वाली कंपनियों की तादाद में भी कमी आई है। पिछले साल 56 कंपनियों के मुकाबले इस साल अब तक कैंपस में 27 कंपनियां कम आईं। एनआईटी मणिपुर में भी ऑफर में 40 फीसदी की गिरावट आई है। औसत सैलरी तो गिरकर इस साल 7 लाख रुपये रह गयी है। जबकि पिछले साल एनआईटी मणिपुर में उच्चतम पैकेज करीब 47 लाख रुपये था।
बहरहाल ये आंकड़े भविष्य को लेकर अलार्मिंग बेल की तरह हैं। जिस प्रकार शिक्षा का खर्च बढ़ रहा है और इसके बरक्स जिस तरह रोजगार के अवसर घट रहे हैं, वह भारत जैसे विकासशील देश के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आ सकते हैं। शिक्षा से लोगों की दूरी का भी यह कारन बन सकती है। इसका संकेत पिछले दिनों गुरुग्राम के एक अभिभावक उदित भंडारी के सोशल मीडिया पर लिखे गए उस पोस्ट से मिलता है जिसमें उन्होंने तीसरी क्लास में पढ़ रहे अपने पुत्र की पढाई को लेकर अपना दर्द बयां किया था। उनका कहना था कि अपने बच्चे की पढाई के लिए फिलहाल उन्हें हर महीने 30000 रुपये स्कूल फीस भरने पड़ते हैं और यह हर साल 10 प्रतिशत बढ़ रहा है। अगर फीस में यह बढ़ोतरी जारी रही तो उन्हें अपने बेटे के 12वीं कक्षा में पहुँचने पर 900000 रुपये सालाना फीस भरनी होगी। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब टॉप टेक संस्थानों में प्लेसमेंट की दर लगातार कम हो रही है, तो लोग शिक्षा में निवेश क्या सोच कर करेंगे।
टॉप संस्थानों के कैंपस प्लेसमेंट में आ रही गिरावट पर पेशेवर अजित पी सिंह कहते हैं ‘जब आप आईआईटी को 5 से बढ़ाकर 25 कर देंगे तो ऐसा ही होगा, सभी का महत्व खत्म हो जाएगा। यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण किसी अप्रासंगिक चीज़ का मार्ग प्रशस्त करता है, पैसा कमाने के लिए शिक्षा संस्थान राजनेताओं और उद्योगपतियों के हाथों में चले जाते हैं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अशिक्षित लोगों के हाथों में चली जाती है, तो यही परिणाम देखने को मिलता है।’




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