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अब युवाओं को ड्रोन बनाना और उड़ाना सिखाएगा DU, फर्राटा कंपनी से मिलाया हाथ 

आज की तारीख में शायद ही ऐसा कोई काम होगा जहां ड्रोन का इस्तेमाल न किया जा रहा हो। अब तो फूड डिलीवरी, मेडिसिन डिलीवरी जैसे कामों में भी ड्रोन का इस्तेमाल होने लगा है। ऐसे में ड्रोन के बढ़ते बाजार को देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने भी अपने छात्रों के लिए ड्रोन बनाने और इसे उड़ाने से संबंधित एक कोर्स की शुरुआत कर दी है। 

जी हां, दिल्ली यूनिवर्सिटी में अब स्टूडेंट्स को ड्रोन बनाने, उड़ाने और मरम्मत की ट्रेनिंग दी जाएगी। देशभर में ड्रोन की उपयोगिता को देखते हुए स्टूडेंट्स के लिए पायलट ट्रेंनिंग फॉर ड्रोन नाम से एक कोर्स की शुरुआत की जा रही है। यह स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के तहत शुरू किया जाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी के ओपन लर्निंग स्कूल में अब तक इनोवेशन के क्षेत्र में कुल 12 कोर्सेज शुरू किए जा चुके हैं। ड्रोन ट्रेंनिंग इनोवेशन सेंटर का 13वां कोर्स होने वाला है। इस कोर्स का हिस्सा बनने के लिए देशभर से छात्र आवेदन कर सकते हैं। 

पहले स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में इनोवेटिव कोर्स नहीं थे, लेकिन पिछले दो सालों में ओपन लर्निंग में भी कई कोर्स की शुरुआत की गई है, जिससे बच्चे कम समय में इनोवेशन की ओर बढ़ें और कोई स्किल्ड कोर्स जरूर करें। इन कोर्सेज को लाने का उद्देश्य है छात्रों में स्क्लिस लर्निंग को बढ़ावा देना और छात्रों को इनोवेशन की ओर आकर्षित करना। 

इस कोर्स में दाखिला लेना बेहद आसान है। स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के तहत दाखिले की शुरुआत 21 जुलाई से होगी। इस दिन ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन मोड में आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल कोर्स बिगनर लेवल से शुरू होगा, जिसमें ड्रोन उड़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद अगले लेवल पर ड्रोन बनाना और इसकी मरम्मत करना भी स्टूडेंट्स को सिखाया जाएगा। यह पूरा कोर्स 40 घंटे का होगा, यानी इसे कुछ महीनो में ही खत्म कर दिया जाएगा। इसमें स्टूडेंट्स को थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी जाएगी। इस कोर्स में डिग्री लेने के लिए छात्र को 12वीं पास होना चाहिए। इसके अलावा कोई भी अलग क्राइटेरिया एडमिशन के लिए नहीं रखा गया है। इस कोर्स की फीस सिर्फ 10 हजार रुपये है। ट्रेनिंग खत्म करने के बाद स्टूडेंट्स को ड्रोन पायलट का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। 

ख़ास बात यह है कि इस कोर्स के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने फर्राटा नाम की ड्रोन कंपनी के साथ हाथ मिलाया है। इस कंपनी को उन लोगों ने बनाया है जो आर्म्ड फोर्सेज को बहुत करीब से जानते हैं  दिल्ली यूनिवर्सिटी इस ग्रुप के साथ मिलकर आने वाले वक्त में स्टूडेंट्स को ड्रोन बनाने और उड़ाने की ट्रेनिंग देने वाली है। यह ग्रुप चंडीगढ़ का है जो बीते कई सालों से ड्रोन बनाने का ही काम कर रहा है। 

फर्राटा के फाउंडर संदीप खुद डिफेंस बैकग्राउंड से आते हैं और ड्रोन में उनकी बहुत दिलचस्पी रही है। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्तों के साथ यह तय किया कि न सिर्फ ड्रोन बनाया जाए बल्कि ड्रोन की ट्रेनिंग भी कॉलेज में देनी चाहिए। वह जस्ट ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के ड्रोन का सीमाओं पर भी इस्तेमाल किया जाता है।  इसका वजन लगभग 5 किलो है और यह सर्विलांस यानी सीसीटीवी की तरह काम करता है। इसे एक बार हवा में उड़ा दिया जाए तो यह 3 किलोमीटर तक के दायरे की तस्वीर ले लेता है और उसमें इंसान और ऑब्जेक्ट की पहचान भी कर लेता है।

 

Asmita Sarkar

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