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DU में अब लॉ फैकल्टी में स्टूडेंट्स को पढ़ाए जाएंगे तीनों नए कानून

छात्रों को अपडेट रखने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में एक जुलाई को लागू हुए तीनों नए कानून पढ़ाना शुरू किया जाने वाला है। इसके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी यानी डीयू (DU) का फैकल्टी ऑफ लॉ अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करने की प्रक्रिया में है ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र में लागू हुए तीन नए दंड विधियों को शामिल किया जा सके। डीयू की 12 जुलाई को प्रस्तावित अकादमिक परिषद की बैठक में इनको पढ़ाने का प्रस्ताव लाया जाएगा। 

1 जुलाई से प्रभावी हुए भारतीय न्याय संहिता (2023), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (2023) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (2023) के पाठ्यक्रमों को कोर्स में शामिल किया जाएगा। इससे पहले भारतीय दंड संहिता (आइपीसी 1860), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी 1973) और इंडियन एविडेंस एक्ट (1872) को पढ़ाया जा रहा था। विधि संकाय की पाठ्यक्रम समिति ने पिछले माह नए प्रोग्राम का मसौदा तैयार किया था जो जून में स्टैंडिंग अफेयर्स कमेटी ने अप्रूव किया था। सिलेबस में बदलाव करने का प्रस्ताव 12 जुलाई को होने वाली आगामी शैक्षणिक परिषद की बैठक के एजेंडे में रखा गया है।  

फैकल्टी ऑफ लॉ की डीन प्रोफेसर अंजू वली टिकू का कहना है कि अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो हम इसे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ पढ़ाना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं शुरू हो चुकी हैं और शिक्षक बदलावों को शामिल करने के लिए तैयार हैं। डीन ने बताया कि नए सिलेबस का ज्यादातर मटेरियल वही रहता है, मगर छात्रों और शिक्षकों को नए सेक्शनों को याद रखना होगा। 

सिलेबस कमेटी के सदस्य रहे विधि संकाय के सहायक प्रोफेसर मेघ राज का कहना है कि हालांकि बदलाव के दौरान कुछ भ्रम हो सकता है, लेकिन पाठ्यक्रम को समय पर अपडेट करना एक सकारात्मक कदम है। प्रो. राज ने कहा कि ऐसे छात्रों के लिए स्पेशल क्लास की व्यवस्था करनी होगी, जिन्होंने पहले से ही पुराने कानूनों का अध्ययन कर लिया है, क्योंकि उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन करते समय या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नए कानूनों को जानने की जरूरत रहेगी। 

बताते चलें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नया एकेडमिक सेशन आगामी एक अगस्त से शुरू हो रहा है। डीयू की ओर से एकेडमिक कैलेंडर भी आधिकारिक साइट पर जारी कर दिया गया है। डीयू भारत का पहला ऐसा संस्थान होगा जहां तीनों कानूनों के लागू होने के फौरन बाद क्रिमिनल लॉ के तहत इन्हें पढ़ाना शुरू किया जाएगा।

Asmita Sarkar

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