
जनसंख्या बढ़ने के साथ ही दुनियाभर में भुखमरी का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। आंकड़ा कहता है कि दुनिया का हर 11 वां इंसान भुखमरी का सामना करने को मजबूर है। वहीं दुनिया की एक तिहाई आबादी ऐसी है, जो पोषण युक्त आहार खरीदने में सक्षम नहीं है। लेकिन सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि इस आधुनिक दुनिया में हर 11वां इंसान अभी भी खाली पेट सोने को मजबूर है। आसान भाषा में कहा जाएगा तो दुनिया में 73.3 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें भरपेट खाना नसीब नहीं हो रहा है। 2019 की तुलना में इनकी संख्या में 15.2 करोड़ का इजाफा हुआ है। अफ्रीका में तो हर पांचवें व्यक्ति के सामने पेट भरने का संकट है।
दुनिया में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति पर जारी हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 233 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें नियमित पर्याप्त भोजन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वहीं इनमें 86.4 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें कुछ समय बिना भोजन के गुजारना पड़ता है। पोषण के मामले में दुनिया 15 साल पीछे चली गई है और कुपोषण का स्तर 2008-2009 के स्तर पर पहुंच चुका है। ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2024’ रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन, अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष, यूनिसेफ, विश्व खाद्य कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से प्रकाशित की है।
वैश्विक स्तर पर ये रिपोर्ट चिंताजनक है। रिपोर्ट में चेताया गया है कि अगर यही स्थिति बनी रहेगी तो 2030 तक करीब 58.2 करोड़ लोगों को लम्बे समय तक कुपोषण से जूझना पड़ सकता है। यह स्थिति खासकर अफ्रीका के लिए काफी ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि इनमें से करीब आधे लोग अफ्रीकी महाद्वीप के होंगे।
खाद्य एवं कृषि संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के मुताबिक, हम अभी भी दुनिया को भुखमरी, खाद्य असुरक्षा और कुपोषण से छुटकारा दिलाने के लक्ष्य की दिशा से काफी पीछे हैं। वर्तमान में अफ्रीका की 20 फीसदी से ज्यादा आबादी खाने की कमी से जूझ रही है।
जानकारी के मुताबिक दुनिया में स्वस्थ आहार तक पहुंच भी एक गंभीर मुद्दा है। दुनिया की एक तिहाई आबादी को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में करीब 280 करोड़ से ज्यादा लोग पोषण युक्त आहार का खर्च उठा पाने में असमर्थ थे। यह समस्या कमजोर देशों में कहीं ज्यादा गंभीर है, वहां पर 71.5 फीसदी आबादी स्वस्थ पोषण युक्त आहार का खर्च उठा पाने में असमर्थ है। हालांकि एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में महामारी से पहले की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अफ्रीका में स्थिति कहीं ज्यादा खराब हुई है। पश्चिमी एशिया, कैरीबियाई देशों और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में स्थिति पहले से खराब हुई है। अफ्रीका की 58 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में खाद्य असुरक्षा से प्रभावित है।
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 15% बच्चे अभी भी वजन में कमी की समस्या से ग्रस्त हैं। वहीं, पांच वर्ष से कम आयु के 22.3% की लंबाई उनकी उम्र के हिसाब से कम है। कमजोरी के शिकार बच्चों की संख्या में कोई खास सुधार नहीं हुआ है, जबकि महिलाओं में एनीमिया की समस्या पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।




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