
फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार को पत्र लिखकर दिल्ली विश्वविद्यालय के दृष्टिहीन शिक्षकों (ब्लाइंड टीचर) को सातवें वेतन आयोग के अनुसार रीडर अलाउंस बढ़ाए जाने की मांग की है।
डॉ. हंसराज सुमन ने कहा है कि यूजीसी की ओर से इन दृष्टिहीन शिक्षकों को एक साल में 36 हजार रुपये रीडर अलाउंस दिया जाता है यानी प्रति महीने 3 हजार रुपये। वर्तमान में दिया जाने वाला रीडर अलाउंस बहुत ही कम है। यह रीडर अलाउंस केवल स्थायी शिक्षकों को ही दिया जाता है, जबकि वर्षो से दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दृष्टिहीन एडहॉक टीचर्स भी पढ़ा रहे हैं। लिहाजा, उन्हें भी रीडर अलाउंस दिया जाना चाहिए।
फोरम के चेयरमैन ने यूजीसी चेयरमैन को लिखे पत्र में बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न विभागों व कॉलेजों में लगभग 100 दृष्टिहीन स्थायी शिक्षक है। इन दृष्टिहीन शिक्षकों को पिछले एक दशक से सालाना रीडर अलाउंस 36 हजार रुपये मिल रहा है जबकि इस अवधि में हर वस्तु की कीमत कई गुणा बढ़ी है। उनका कहना है कि सातवें वेतन आयोग के बाद जहां अतिथि शिक्षक को हर महीने 25 हजार रुपये दिया जाता था लेकिन फरवरी 2019 से अतिथि शिक्षकों का वेतन 25 हजार से बढ़ाकर अधिकतम 50 हजार रुपये किया गया है। लेकिन यूजीसी ने इन दृष्टिहीन शिक्षकों का रीडर अलाउंस आज तक नहीं बढ़ाया जबकि सातवां वेतन आयोग लागू हुए आठ साल हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी चिंता जताई है कि यह रीडर अलाउंस साल में एक बार अप्रैल से मार्च के बीच आता है। उनका कहना है कि कोई भी दृष्टिहीन शिक्षकों को पढ़ाने वाला रीडर सालभर तक रीडर अलाउंस का इंतजार नहीं करता। रीडिंग करने वाले शोधार्थियों / छात्रों का कहना है कि जब शिक्षकों को हर महीने वेतन मिलता है तो एक रीडर को रीडर अलाउंस हर महीने या तीन महीने का एक साथ क्यों नहीं दिया जा सकता?
डॉ. सुमन ने यूजीसी को लिखे पत्र में चेयरमैन से यह मांग की है कि इन दृष्टिहीन शिक्षकों का रीडर अलाउंस 36000 रुपये की वार्षिक राशि से बढ़ाकर कम से कम तीन गुणा किया जाए यानी उन्हें सालाना एक लाख रुपये करने की मांग की है।




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