
संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली कोचिंग हादसे का मुद्दा आज दोनों सदनों में जोरशोर से उठा। समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा, ‘यह एक दर्दनाक घटना है। योजना बनाना और एनओसी देना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि कौन जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? यह अवैध निर्माण का सिर्फ एक मामला नहीं है, हम यूपी में देख रहे हैं कि अवैध इमारतों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, क्या यह सरकार यहां बुलडोजर चलाएगी या नहीं?’
वहीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने दिल्ली की घटना के लिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ‘जिन छात्रों की मौत हुई, वह दिल्ली में रहकर आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, लेकिन दुख के साथ मुझे कहना पड़ेगा कि दिल्ली सरकार ने लापरवाही बरती, जिसकी वजह से छात्रों को जान गंवानी पड़ी। तीन छात्रों की मौत दिल्ली सरकार की संवेदनहीनता दर्शाती है, जो दिल्ली में बीते एक दशक से सत्ता में है, लेकिन दिल्ली के लोगों के लिए कोई काम नहीं किया गया।’
इस बीच ओल्ड राजेंद्र नगर के कोचिंग की घटना को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ। उन्होंने दिल्ली नगर निगम को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसपर अब आम आदमी पार्टी का कब्ज़ा है। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हलके बल का इस्तेमाल भी करना पड़ा। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भी हादसे वाली जगह यानि राव कोचिंग संस्थान पहुंचकर मुआयना किया, प्रदर्शनकारी छात्रों से बात की और उन्हें मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में दिल्ली कोचिंग हादसे पर कहा कि ‘यह हैरान करने वाली स्थिति है, जब संघ लोक सेवा आयोग के जरिए देश की सेवा करने का सपना देखने वाले छात्रों और उनके परिजनों का सपना बर्बाद हो गया। इसमें मुआवजा दिया जाना चाहिए, लेकिन कोई भी मुआवजा इस हादसे की भरपाई नहीं कर सकता। कई ऐसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। नियमों का गंभीर रूप से उल्लंघन हुआ। फायर सेफ्टी, बाढ़ सुरक्षा जैसे नियमों की अनदेखी की गई। ऐसे मामलों में निगम की भी जिम्मेदारी बनती है क्योंकि सभी जरूरी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट बिना जांच के दिए गए।’
राज्यसभा में दिल्ली कोचिंग हादसे पर चर्चा की मांग पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘मुझे नियम 267 के तहत नोटिस मिले हैं…उन्होंने अधिकारियों की लापरवाही के कारण दिल्ली में यूपीएससी उम्मीदवारों की दुखद मौत पर चर्चा की मांग की है। मुझे लगता है कि आज कोचिंग व्यापार बन गई है। जब भी हम कोई समाचार पत्र पढ़ते हैं, तो पहले एक या दो पृष्ठ उनके विज्ञापनों के ही होते हैं।’
सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा, ‘यह बहुत चौंकाने वाला है, बहुत दुखद है। ऐसी व्यवस्था की अनुमति कैसे दी जा रही है? ऐसी व्यवस्था के लिए किसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए? बेसमेंट में कोचिंग सेंटरों को अनुमति देने के लिए कानूनी मंजूरी या तकनीकी मंजूरी क्या है?”




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