
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में पॉलीटेक्निक परीक्षा से पहले जांच के नाम पर दलित छात्र के कपड़े उतरवाने का आरोप लगा है। छात्र का कहना है कि दलित होने के कारण उसके साथ यह सुलूक किया गया। मानसिक तनाव से गुजर रहे पीड़ित ने डीएम को प्रार्थनापत्र देकर शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कॉलेज की कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
राठ कोतवाली के सरसई गांव में राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज है। इसके छात्र गोविंद पुत्र जगपाल ने प्रार्थना-पत्र में कहा है कि वह कॉलेज में इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहा है। 26 जुलाई को द्वितीय सत्र की परीक्षा देने गया तो गेट पर चेकिंग की जा रही थी। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने उसकी तलाशी ली। चेकिंग पूरी होने के बाद भी उसे प्रवेश नहीं दिया गया और दोबारा चेकिंग के बहाने स्टाफ ने सबके सामने उसके कपड़े उतरवा दिए। वहां पर महिला कर्मचारी व दाखिला कराने आए छात्र व छात्राएं भी थीं।
पीड़ित का आरोप है कि शिक्षकों ने उसके साथ अभद्रता भी की। मना करने पर मारपीट करने का प्रयास किया गया। घटना के बाद से छात्र मानसिक तनाव में है। कार्यवाहक प्रधानाचार्य वंदना गुप्ता ने कहा कि परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की जांच की जाती है। इस छात्र की भी जांच की गई। जबरन कपड़े उतरवाने का आरोप निराधार है।
इस बीच अपर जिलाधिकारी डॉ. नागेंद्र नाथ यादव ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा, “छात्र के कपड़े उतरवाए जाने का मामला संज्ञान में आया है। पॉलीटेक्निक कॉलेज की प्रधानाचार्या से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।”




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