
यूपीएससी कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस चलाने वाले शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति ने ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राव आईएएस स्टडी सर्किल में हुए हादसे पर दुख जताया है और कहा है कि सरकार को कोचिंग संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘इस दुर्घटना को लेकर विद्यार्थियों में जो रोष दिख रहा है, वह पूरी तरह न्यायसंगत है। बहुत अच्छा होगा यदि इस रोष को सटीक दिशा मिले और सरकार कोचिंग संस्थाओं के लिये निश्चित दिशानिर्देश लागू करे। इस संबंध में हम सरकार के साथ सक्रिय सहयोग करने को तत्पर हैं।’
हालांकि दिव्यकीर्ति ने विभिन्न एजेंसियों के कानूनों में “अस्पष्टता और विरोधाभास” होने का दावा करते हुए यह भी कहा कि कोचिंग संस्थानों से जुड़ी यह समस्या उतनी सरल है नहीं जितनी दिखती है। गौरतलब है कि हादसे के बाद मुखर्जी नगर में बेसमेंट में चलने वाली जिन कोचिंग क्लासेस को सील किया गया था, उसमें विकास दिव्यकीर्ति के दृष्टि IAS का भी एक सेंटर शामिल था। संस्थान का बेसमेंट सील किए जाने के बाद सोमवार रात बड़ी संख्या में छात्रों ने उनके घर के बाहर जमा होकर इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग की थी। उसके बाद से ही इस मामले पर विकास दिव्यकीर्ति की प्रतिक्रिया का इंतज़ार किया जा रहा था, जो अब सामने आई है।
मुखर्जी नगर में अपने संस्थान के खिलाफ दिल्ली नगर निगम की कार्रवाई के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में दिव्यकीर्ति ने बयान जारी करने में देरी के लिए खेद जताया और कहा कि वह सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं। दिव्यकीर्ति ने ‘एक्स’ पर साझा अपने बयान में कहा, “हमें खेद है कि हमने अपना पक्ष रखने में देरी की। दरअसल, हम अधूरी जानकारी के आधार पर कुछ नहीं कहना चाहते थे। इस देरी के लिए हम हृदय से क्षमा चाहते हैं।”
उन्होंने तीनों मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “हम शनिवार को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिसमें तीन छात्रों- श्रेया यादव, तान्या सोनी और निविन दल्विन की असामयिक व दुखद मृत्यु हो गई।”
दिव्यकीर्ति ने कहा कि “कोचिंग संस्थानों से जुड़ी यह समस्या उतनी सरल नहीं है जितनी दिखती है। इसके कई पहलू हैं जो कानूनों की अस्पष्टता और विरोधाभास से जुड़े हैं। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली अग्निशमन विभाग के नियमों में असंगतियां हैं। इसी तरह, ‘दिल्ली मास्टरप्लान-2021’, ‘नैश्नल बिल्डिंग कोड’, ‘दिल्ली फायर रूल्स’ और ‘यूनिफाइड बिल्डिंग बाई-लॉज़’ के प्रावधानों में भी काफी अंतर्विरोध है। ‘दिल्ली मास्टरप्लान-2021’ को छोड़कर किसी भी दस्तावेज़ में कोचिंग संस्थानों के लिये स्पष्ट प्रावधान नहीं दिये गए हैं। आशा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त समिति जब एक माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी तो उसमें ऊपर लिखे अधिकांश बिंदुओं का समाधान मिल सकेगा।”
दिव्यकीर्ति ने यह भी कहा कि उनके कोचिंग संस्थान में छात्रों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “फिलहाल, हमारे प्रबंधन में अग्नि एवं सुरक्षा अधिकारी का एक विशेष पद है। इस पद पर काम कर रहे अधिकारी ने राष्ट्रीय अग्नि सेवा महाविद्यालय (नागपुर) से स्नातक की पढ़ाई की है और वह 14 साल तक बड़े अस्पतालों व मॉल में काम कर चुके हैं। वे प्रत्येक इमारत का नियमित रूप से सुरक्षा ऑडिट करते हैं।”




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