
सरकार ने केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए सांसदों का विवेकाधीन कोटा फिर से शुरू करने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज किया है। राज्यसभा में शिवसेना यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने इस बात की जानकारी साझा की।
चौधरी ने कहा, “सांसदों के कोटे सहित कुछ विशेष प्रावधानों के तहत स्वीकृत छात्र संख्या से अधिक प्रवेश दिए गए थे, जिससे कक्षाओं में छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) बढ़ने के कारण पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए सांसदों के लिए कोटा फिर से शुरू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।”
गौरतलब है कि विशेष प्रावधानों के तहत, सांसदों के पास केंद्रीय विद्यालय में 10 बच्चों के प्रवेश की सिफारिश करने का विवेकाधीन अधिकार था। यहां तक कि एक जिला मजिस्ट्रेट के पास केंद्रीय विद्यालयों में प्रायोजक प्राधिकरण कोटे के तहत 17 छात्रों की सिफारिश करने का अधिकार था। लोकसभा में 543 और राज्यसभा में 245 सांसद मिलकर कोटे के तहत एक साल में 7,880 दाखिले की सिफारिश कर सकते थे। लेकिन केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में केवी में एडमिशन के लिए सांसद कोटे को खत्म कर दिया था।




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