
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में हुए कोचिंग सेंटर हादसे के बाद अब दिल्ली में कोचिंग हब बनाये जाने की तैयारी शुरू हो गयी है। तैयारी की जा रही है ओल्ड राजिंदर नगर, मुखर्जी नगर, बेर सराय, कालू सराय आदि जगहों पर चल रहे कोचिंग सेंटर को एक जगह बसाने की। और इसकी पहल की है एलजी वीके सक्सेना ने। मौका मुआयना के पश्चात उपराज्यपाल का मानना है कि इन कोचिंग सेंटर की वजह से दिल्ली के कई इलाके भारी भीड़-भाड़ वाली बस्तियों में तब्दील हो गए हैं, छात्रों को सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में इन कोचिंग सेंटर के एक जगह होने से छात्रों को माहौल भी मिलेगा और तमाम तरह की सुविधाएं भी मिल पाएंगी।
गौरतलब है कि हादसे के बाद उपराज्यपाल ने UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों, कोचिंग संचालकों, डीडीए और तमाम संबंधित एजेंसियों से बातचीत की थी। इसके बाद उपराज्यपाल की ओर से बयान जारी कर बताया गया है कि इलाके में करीब 90 फीसदी लाइब्रेरी अवैध रूप से बेसमेंट में चलाई जा रही थीं जिसमें MCD के इंजीनियरों के साथ पुलिस और फायर डिपार्टमेंट के अफसरों की मिलीभगत सामने आई है। प्रथम दृष्टया, नियमों का उल्लंघन पाया गया। पता चला कि अधिकारियों, बिल्डरों, मकान मालिकों और इलाके के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच सांठगांठ से ये सब चल रहा था।
बैठक के दौरान ही यह सुझाव आया था कि छोटे-बड़े सभी कोचिंग सेंटर को एक जगह बसाने से इस तरह की दिक्कतों से बचा जा सकता है। डीडीए के वीसी ने प्रस्ताव दिया कि DDA नरेला और रोहिणी आदि इलाके इस तरह का एक कोचिंग हब बना सकता है जहां एक ही जगह अभ्यर्थियों के रहने और पढ़ाई करने की सुविधा होगी। ज्यादातर संस्थानों ने भी इस तरह की जरूरत बताई। कोचिंग सेंटर इससे सहमत दिखे और वहां जाने की इच्छा जताई।
उपराज्यपाल का भी मानना है कि कोचिंग हब बनने से न केवल जरूरी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि छात्रों को उनकी पढ़ाई के लिए एक अच्छा माहौल भी मिलेगा। साथ ही उन्हें किफायती और अच्छी तरह से निर्मित आवासीय सुविधाएं भी मिलेंगी। इसकी व्यवस्था करने के लिए उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी है। इस कमेटी में कोचिंग संस्थानों, छात्रों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के 6 प्रतिनिधि होंगे। यह कमेटी इस मसले पर तुरंत क्या किया जा सकता है, इस पर विचार करेगी।




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