
दिल्ली में आईएएस कोचिंग के बेसमेंट में तीन छात्रों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि कोचिंग सेंटर डेथ चैंबर बन गए हैं और छात्रों की ज़िन्दगी से खेल रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाल की घटना जिसने तीन छात्रों की जान ली, हम सभी की आंखें खोलने वाली है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और उज्जवल भुइयां की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर की सभी कोचिंगों के मामले में सुनवाई का मन बनाते हुए उत्तर प्रदेश व हरियाणा को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और उन्हें भी नोटिस जारी किया है। सभी को 20 सितंबर तक जवाब दाखिल करना होगा।
पीठ ने गत 27 जुलाई को दिल्ली में हुई भारी बारिश के चलते राव आइएएस स्टडी सर्किल के बेसमेंट में पानी भरने के कारण तीन छात्रों की हुई मौत पर चिंता और दुख जताते हुए कहा कि जो उन्होंने पढ़ा है, वह डराने वाला है। पीठ ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो फिलहाल के लिए हम इन कोचिंग सेंटरों को बंद कर देंगे। जबतक कि भवन नियमों और सुरक्षा मानकों का सावधानीपूर्वक पालन न हो, तबतक कोचिंग आनलाइन चलनी चाहिए। ये जगहें (कोचिंग सेंटर) मौत का घर बन गई हैं। कोचिंग सेंटर छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि हाल की घटना जिसने तीन छात्रों की जान ली, हम सभी की आंखें खोलने वाली है। इसलिए कोर्ट इस सुनवाई का दायरा बढ़ा कर मामले में नोटिस जारी करना उचित समझता है। पीठ ने केंद्र सरकार में आवास व शहरी विकास मंत्रालय को और दिल्ली में मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि अभी तक सुरक्षा के क्या मानक निर्धारित किये गए हैं और उनका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है।
पीठ ने मामले की सुनवाई में अटॉर्नी जनरल से मदद करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में कोचिंगों में सुरक्षा के दीर्घकाल और अल्पकाल उपायों पर छात्रों व अन्य हितधारकों से भी सुझाव मांगे हैं। सोमवार को कोर्ट के सामने कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की याचिका सुनवाई पर लगी थी जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के दिसंबर 2023 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
गौरतलब है कि उस आदेश में हाई कोर्ट ने कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी रूल्स के पालन का आदेश दिया था। आदेश में हाई कोर्ट ने कहा था कि जो कोचिंग संस्थान अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रहे उन्हें बंद कर दिया जाए। हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया नाम का संगठन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने फेडरेशन की याचिका को बकवास याचिका बताते हुए एक लाख के जुर्माने सहित खारिज कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इस बात पर हैरानी जताई कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने की बजाय संगठन यहां आ गया।
पीठ ने कहा कि न सिर्फ दिल्ली में कम से कम एनसीआर में किसी भी कोचिंग सेंटर को आग से सुरक्षा व अन्य सुरक्षा मानकों का पालन किये बगैर चलने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं के अलावा सम्मान से मानव जीवन जीने की व अन्य सुविधाएं होनी चाहिए। जैसे हवा आने का उचित प्रबंध, निकासी, रोशनी, बिजली, पीने का पानी वाशरूम आदि और अन्य जरूरी सुविधाएं। इनके बारे में विधायी नियम और दिशानिर्देश तय किये जा सकते हैं।




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