
दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को NCERT और SCERT द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
दिल्ली सरकार का यह निर्देश शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29 के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के दृष्टिगत है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रक्रियाओं को सरकार द्वारा निर्दिष्ट एक शैक्षणिक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित करने का प्रावधान है।
शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने कहा कि शैक्षणिक प्राधिकरण (NCERT/SCERT) द्वारा प्रकाशित या निर्धारित पुस्तकें रखने के आधार पर किसी भी बच्चे के साथ भेदभाव, उत्पीड़न या उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसे ‘मानसिक या शारीरिक पीड़ा’ हो। बच्चे के खिलाफ की गई ऐसी कोई भी कार्रवाई किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अंदर आएगी।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर दिशा-निर्देश प्रदर्शित करने चाहिए और जानकारी के लिए इसे अभिभावकों के साथ भी साझा करना चाहिए। हालांकि पहले भी स्कूलों को इस बारे में सूचित किया गया था, लेकिन कई स्कूल अभी भी इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
बहरहाल, दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के निर्देशों को अखिल भारतीय अभिभावक संघ ने “अव्यवहारिक” बताया है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा, “ऐसे मामलों में, अधिकारी निजी स्कूलों को नियंत्रित नहीं कर सकते क्योंकि स्कूल आसानी से अभिभावकों को एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पुस्तकों के अलावा निजी प्रकाशन की पुस्तकें रखने के लिए मना सकते हैं।”




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