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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पेयजल एवं सीवरेज कार्य के आवंटन में गड़बड़ी का आरोप, सपा MLC ने सीएम को लिखा पत्र  

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में पेयजल पाइपलाइन, पंप हाउस तथा नई सीवर लाइन बिछाने के लिए कार्यदायी संस्था के आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने आरोप लगाया है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पेयजल एवं सीवरेज का कार्य विशेषज्ञ संस्था जल निगम को दरकिनार करके भवन निर्माण की संस्था उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को आवंटित किया गया है। उन्होंने इस आवंटन में धनराशि के दुरुपयोग की आशंका जताई है।

एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले में साठगांठ और मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन वितरण प्रणाली, पंपहाउस तथा नई सीवर लाइन एवं ड्रेनेज चैंबर के निर्माण के लिए 861.78 लाख का बजट तैयार किया गया है। शासन की ओर से निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में 430.87 लाख रुपये जारी करने की स्वीकृति भी हो गई है। लेकिन जिस प्रकार पेयजल एवं सीवरेज का कार्य विशेषज्ञ संस्था जल निगम को दरकिनार करके भवन निर्माण की संस्था उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को आवंटित किया गया है, उससे इस मामले में धनराशि के दुरुपयोग की आशंका है। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पेयजल एवं सीवरेज का कार्य जल निगम से कराने का शासनादेश जारी किया गया है, लेकिन साठगांठ एवं मिलीभगत कर उक्त कार्य आवास विकास परिषद को आवंटित किया गया है। जबकि आवास विकास के पास काम कराने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि विश्वविद्यालय में पेयजल एवं सीवरेज का कार्य विशेषज्ञ संस्था जल निगम से कराने का आदेश संबंधित को देने की कृपा करें।

विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने 31 जुलाई को पत्र भेजकर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव व वित्त अधिकारी को पत्र भेजकर पेयजल आपूर्ति पाइपलाइन, सीवरेज एवं पंपहाउस व ड्रेनेज चैंबर के निर्माण के लिए प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति की जानकारी दी है। उन्होंने पत्र में 21 नियत, शर्त और प्रतिबंधों के आधार पर कार्य कराने का निर्देश दिया है। इसमें दूसरी शर्त में यह उल्लेख किया गया है कि वाटर सप्लाई एवं सीवरेज संबंधी कार्य सामान्यत: जल निगम द्वारा कराए जाते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि इस कार्य के लिए नामित कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद के पास सक्षम तकनीकी मैन पावर उपलब्ध हो।

 

Asmita Sarkar

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