
मध्य प्रदेश के कॉलेजों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं द्वारा लिखी गई किताबें पढ़ाने के सरकारी आदेश ने विवाद पैदा कर दिया है। मध्य प्रदेश सरकार ने एक निर्देश जारी कर राज्य के सभी कॉलेजों के लिए आरएसएस के नेताओं द्वारा लिखी किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल करना अनिवार्य कर दिया है। विपक्ष इसे एक विभाजनकारी विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश बता रहा है, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का कहना है कि पहले एक राष्ट्र-विरोधी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा था। इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कोई भी विचारवान लेखक होगा तो उसकी लिखी पुस्तक भी लाइब्रेरी में रखी जाएगी। फिर चाहे वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हों या अन्य कोई भी हों। आपकी इच्छा हो तो पढ़ो और नहीं इच्छा है, तो मत पढ़ो।
भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान CM यादव ने कहा कि कॉलेज के वाचनालय और ग्रंथालयों में सिर्फ आरएसएस ही नहीं, बल्कि सभी विचारकों की पुस्तकें रखी जाएंगी।उन्होंने कहा, अभी पाठ्यक्रम का कोर्स बना नहीं है। अभी वो कोर्स बनना बाकी है। उसकी अपनी कमेटी है, उसका अध्ययन मंडल फाइनल करेगा।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि 55 जिलों के अंदर बनाए गए पीएम एक्सीलेंस कॉलेजों में हमने लाइब्रेरी बनाई है। कोई भी विचारवान लेखक होगा तो उसकी लिखी पुस्तक भी लाइब्रेरी में रखी जाएगी। हम अगर पुस्तकालय में पुस्तकें न रखें तो क्या करें? फिर चाहे अब वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हों या अन्य कोई भी हों। आपकी इच्छा हो तो पढ़ो और नहीं इच्छा है, तो मत पढ़ो।
बता दें कि मध्य प्रदेश के कॉलेजों में नई किताबें खरीदे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के लिए यह पुस्तकें खरीदी जानी है। ये किताबें पाठ्यक्रम का हिस्सा न होकर छात्रों की पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी में रखी जाएंगी। इनमें से कुछ किताबों के लेखक आरएसएस विचारक भी हैं।
मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. धीरेंद्र शुक्ला ने सरकारी और प्राइवेट सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को 88 पुस्तकों का सेट खरीदने का निर्देश दिया है। इन पुस्तकों में प्रमुख आरएसएस नेताओं जैसे सुरेश सोनी, दीनानाथ बत्रा, अतुल कोठारी, देवेन्द्र राव देशमुख और संदीप वासलेकर की किताबें शामिल हैं। सभी लेखक आरएसएस की शैक्षिक शाखा विद्या भारती से जुड़े हैं। विभाग ने कॉलेजों को जल्द से जल्द इन किताबों को खरीदने के लिए कहा है।
सीएम यादव ने कहा कि हमारे यहां कहा गया है कि सर्वे भवंतु सुखिन:, इसलिए हम तो सभी के लिए सोचकर चलने वाले हैं। दसों दिशाओं से जो विचार आते हैं, उसमें से हम अपने मूल विचार को भूले नहीं हैं। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि वाचनालय, ग्रंथालय इसीलिए होते हैं, अभी ये परंपरा थोड़ी कम हो गई है। लाइब्रेरी में सभी प्रकार के कोर्स की पुस्तकें होने चाहिए।
बता दें कि राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों से कहा है कि वे बिना देरी इन किताबों को खरीदें। यह निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, जो अकादमिक पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपराओं को शामिल करने की वकालत करती है। विभाग के पत्र में यह भी सिफारिश की गई है कि प्रत्येक कॉलेज में एक इंडियन नॉलेज ट्रेडिशन सेल का गठन किया जाए, जो विभिन्न ग्रेजुएशन कोर्सेज में इन किताबों को शामिल करने में मदद करेगा।




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