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डीयू में आरक्षित वर्ग के शिक्षक पदों को भरने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाने की मांग 

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन व महासचिव प्रोफेसर के.पी. सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि जिन कॉलेजों ने अपने यहाँ शिक्षक पदों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर ली है, उन कॉलेजों के प्रिंसिपलों को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एक सर्कुलर जारी कर सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे प्रिंसिपल पदों पर आरक्षण व रोस्टर रजिस्टर तैयार कर उन्हें भरें। प्रोफेसर पदों पर आरक्षण तथा शिक्षक पदों का बैकलॉग व शॉटफाल पूरा करने के लिए डीओपीटी, यूजीसी गाइडलाइंस -2006 का पालन करते हुए प्रोफेसर काले कमेटी द्वारा सुझाए गए नियमों के तहत शॉर्टफाल व बैकलॉग पदों को निकालकर इन पदों को स्पेशल ड्राइव के तहत (विशेष भर्ती अभियान) भरा जाए ताकि इन वर्गों के साथ वास्तविक रूप में सामाजिक न्याय हो सके। 

फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को लिखें पत्र में बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नौ साल पहले एससी/एसटी के कल्याणार्थ संसदीय समिति, शिक्षा मंत्रालय, एससी/एसटी कमीशन, यूजीसी व डीओपीटी के अधिकारियों की टीम के साथ 9 जुलाई 2015 को दिल्ली विश्वविद्यालय में आरक्षण की समीक्षा करने, प्रोफेसर के पदों पर आरक्षण लागू कराने और प्रिंसिपल के पदों पर आरक्षण लागू कराने का आश्वासन देकर गयी थी। साथ ही आरक्षित वर्गों के शैक्षिक व गैर शैक्षिक पदों का शॉटफाल व बैकलॉग पूरा करने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन पिछले नौ साल से संसदीय समिति की रिपोर्ट पर कोई विचार नहीं किया गया, न ही विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उस पर आगे कार्यवाही की गई। प्रोफेसर काले कमिटी की रिपोर्ट को लागू न करने के कारण दलित, पिछड़े वर्ग के शिक्षकों में गहरा रोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि डीयू में प्रिंसिपल पदों के विज्ञापन निकालकर नियुक्तियाँ हो रही हैं, लेकिन उन पदों पर संवैधानिक नियमों के तहत आरक्षण नहीं दिया जा रहा है।  

 डॉ. सुमन ने बताया है कि संसदीय समिति जब  दिल्ली विश्वविद्यालय में आई तो उसने पाया कि यहांँ प्रोफेसर के पदों पर और प्रिंसिपल के पदों पर आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। साथ ही पोस्ट बेस रोस्टर को भी यूजीसी व डीओपीटी के निर्देशानुसार लागू नहीं किया जा रहा है। संसदीय समिति ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। दिल्ली विश्वविद्यालय ने बाद में प्रोफेसर के पदों पर आरक्षण दे दिया लेकिन प्रिंसिपल के पदों पर आज तक आरक्षण नहीं दिया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल के पदों को क्लब करके रोस्टर रजिस्टर तैयार करना चाहिए था, उसके बाद इन पदों को रोस्टर के अनुसार आरक्षण लागू करते हुए विज्ञापित किया जाना चाहिए था। विशेष भर्ती अभियान तथा बैकलॉग के तहत एससी/एसटी, ओबीसी के अभ्यर्थियों से इन पदों को भरा जाना चाहिए था। लेकिन फोरम ने खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि पिछले नौ साल से संसदीय समिति की रिपोर्ट को आज तक दिल्ली विश्वविद्यालय ने लागू नहीं किया है, ना ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने आज तक प्रिंसिपल के पदों का रोस्टर ही तैयार किया है। उन्होंने प्रोफेसर काले कमेटी की रिपोर्ट को एकेडमिक काउंसिल में रखा ही नहीं। 

फोरम के महासचिव प्रोफेसर के.पी. सिंह ने बताया है कि डीयू के कॉलेजों में प्रिंसिपल के पदों पर आरक्षण देने के लिए एससी, एसटी की कल्याणार्थ संसदीय समिति 9 जुलाई 2015 तथा दिसम्बर 2020 में ओबीसी कमीशन दिल्ली विश्वविद्यालय में अपनी टीम के साथ आई थी। 18 दिसम्बर 2015 को समिति ने एक रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत की थी, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों के प्रिंसिपल पदों को क्लब करके रोस्टर रजिस्टर बनाया जाये। इस तरह से दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रिंसिपल पदों पर आरक्षण लागू होने पर एससी-12, एसटी-06 और ओबीसी कोटे के-22 पद बनते हैं, लेकिन आज तक दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रिंसिपल पदों को क्लब करके रोस्टर रजिस्टर तक नहीं बनाया है। इस मुद्दे को विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के सदस्यों ने काउंसिल की मीटिंग में कई बार उठाया है लेकिन इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह मौन है। फोरम ने कुलपति को लिखे पत्र में बताया है कि यूजीसी गाइडलाइंस-2006 के अनुसार प्रोफेसर के पदों पर आरक्षण देना अनिवार्य किया गया है। प्रोफेसर और प्रिंसिपल के पद एक ही वेतनमान के हैं तो फिर प्रिंसिपल के पदों पर आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है ? 

प्रोफेसर सिंह ने यह भी मांग की है कि जिन कॉलेज में ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल बने पांच साल से ज्यादा हो चुके हैं उन्हें तुरंत हटाकर क्लब किए गए रोस्टर के अनुसार प्रिंसिपलों के पदों का विज्ञापन निकाल कर नियुक्ति की जाए। उन्होंने बताया है कि दिल्ली सरकार के कॉलेजों में 15 से अधिक प्रिंसिपलों के पदों पर स्थायी नियुक्ति होनी है, इन पदों पर ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल लगे हुए है।  प्रोफेसर सिंह ने बताया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रोफेसर काले कमेटी की रिपोर्ट को सही से लागू करता है तो प्रिंसिपल के एससी -12 एसटी -06 व ओबीसी -22 पदों पर प्रिंसिपल पदों  पर नियुक्ति होगी। उनका कहना है कि पांच साल कार्यकाल पूरा कर चुके प्रिंसिपलों को हटाकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से कार्यवाहक या स्थायी प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जाए।

 

Asmita Sarkar

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