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फिजिकल एजुकेशन टीचर्स को रोस्टर रजिस्टर में शामिल करने के लिए डीयू कुलपति को लिखा पत्र 

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को पत्र लिखकर फिजिकल एजुकेशन टीचर्स को रोस्टर रजिस्टर में शामिल करने व कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट निकाले जाने की मांग की है। 

उन्होंने पत्र में लिखा है कि कुछ कॉलेजों द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट ना निकालकर उसके स्थान पर डायरेक्टर फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट निकाली जा रही है जिससे उस पोस्ट को रोस्टर से बाहर कर दिया गया है जबकि इन कॉलेजों में पहले बने रोस्टर के आधार पर एससी/एसटी व ओबीसी की पोस्ट पर लंबे समय से एडहॉक असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन टीचर के रूप में कार्य कर रहे है। फिजिकल एजुकेशन डायरेक्टर की पोस्ट निकाले जाने पर फोरम ने इसे एससी/एसटी व ओबीसी पदों को समाप्त करने की साज़िश बताया है। 

उन्होंने बताया है कि इन कॉलेजों में लगभग 200 टीचर्स हैं और प्रत्येक कॉलेज में दो -तीन टीचर हैं। यदि सही से रोस्टर बने तो एससी/एसटी व ओबीसी कोटे के अभ्यर्थियों को पूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सकता है, लेकिन कॉलेजों द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन के स्थान पर डायरेक्टर फिजिकल एजुकेशन के नाम से पदों को निकाला जा रहा है। 

फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि कुछ कॉलेजों में रोस्टर के कारण ही एससी/एसटी और ओबीसी की पोस्ट बनने पर वे असिस्टेंट प्रोफेसर एडहॉक के रूप में वहाँ पढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में फिजिकल एजुकेशन का कोर्स भी लगाया गया है जिसे विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि डायरेक्टर फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट करने से रोस्टर रजिस्टर से बाहर हो जाती है और उनकी सेवानिवृत्त की उम्र 62 साल है जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन की उम्र यूजीसी नियमानुसार 65 साल है। इतना ही नहीं, यदि कॉलेज डायरेक्टर फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट निकालते हैं तो जो एडहॉक टीचर्स वहां पढ़ा रहे हैं, वे  सिस्टम से बाहर हो जाएंगे। डॉ. सुमन ने आगे बताया कि डायरेक्टर की पोस्ट विश्वविद्यालय के विभागों में होती है जबकि कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन का पद होता है। 

              डॉ. सुमन ने बताया है कि पिछले दिनों डीन ऑफ कॉलेजिज व डूटा का प्रतिनिधिमंडल कुलपति से मिला तो उनसे विभिन्न कॉलेजों में एडहॉक रूप में कार्य कर रहे फिजिकल एजुकेशन टीचर्स के मुद्दों पर चर्चा की थी। उन्हें बताया गया था कि कुछ कॉलेज फिजिकल एजुकेशन डायरेक्टर की पोस्ट निकाल रहे हैं जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट होनी चाहिए और उसे रोस्टर रजिस्टर में शामिल करने के लिए भी कहा था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जिस पोस्ट की जो नेचर (प्रकृति) है, वह उसी पद से भरा जाएगा। इसके बाद भी कॉलेजों द्वारा डायरेक्टर की पोस्ट का विज्ञापन निकाला जा रहा है। 

डॉ. सुमन ने पुनः विश्वविद्यालय प्रशासन से फिजिकल एजुकेशन टीचर्स की पोस्ट को अपने रोस्टर रजिस्टर में शामिल करते हुए आरक्षित श्रेणी के पदों से भरने की मांग की है  उन्होंने फिजिकल एजुकेशन की पोस्ट का रोस्टर रजिस्टर में सार्वजनिक करने के लिए कॉलेज की वेबसाइट व विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर डालने की मांग की है । उन्होंने मांग की है कि जो कॉलेज फिजिकल एजुकेशन टीचर्स की पोस्ट को वेबसाइट पर न डाले, उसके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए तथा यूजीसी से ग्रांट बंद करने के लिए लिखा जाए।

Asmita Sarkar

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