
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आयोजित एक कार्यक्रम में लेखक संजीव कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘ट्रेजर्स ऑफ द गुप्ता एम्पायर’ का विमोचन उस पर चर्चा का आयोजन किया गया। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. बी.आर. मणि रहे।
यह पुस्तक गहन शोध पद्धति और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर गुप्त साम्राज्य (चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी) के बारे में अब तक अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है। साथ ही यह पुस्तक भारत के सबसे प्रभावशाली ऐतिहासिक कालों में से एक, गुप्त साम्राज्य, की हमारी समझ को बदलने का वादा करती है। पुस्तक पर चर्चा के दौरान लेखक संजीव कुमार ने कहा कि यह पुस्तक चार दशकों के निरंतर और गहन शोध के बाद लिखी गई है और यह गुप्त साम्राज्य के इतिहास को एक नई दृष्टि से देखने का अवसर प्रदान करेगी।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने डिजिटल लेन-देन के युग में सिक्कों पर आधारित इस पुस्तक की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और विश्वविद्यालयों में मुद्राशास्त्र के अध्ययन की कमी की ओर ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सभ्यता के इतिहास, अर्थव्यवस्था और आइकनोग्राफी के क्षेत्र में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और संभवतः वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को प्रभावित करेगा।
यह अद्वितीय पुस्तक अंतर्राष्ट्रीय इतिहासकारों और विद्वानों से व्यापक सराहना प्राप्त कर चुकी है। पुस्तक, गहन शोध पद्धति और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर, गुप्त साम्राज्य (चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी) के बारे में अब तक अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है। इस किताब के जरिए संजीव कुमार भारतीय इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाते हैं और भारत के समृद्ध अतीत की कहानी को नए तरीके से पेश करते हैं।
चर्चा कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के एमिरटस प्रोफेसर पद्म श्री के.के. थपल्याल, मुंबई विश्वविद्यालय के डी.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूमिस्मैटिक्स एंड आर्कियोलॉजी के पूर्व निदेशक डॉ. दिलीप राजगोर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल, पुस्तक के लेखक संजीव कुमार, आईजीएनसीए के कला निधि प्रभाग के प्रमुख व डीन (प्रशासन) प्रो. रमेश चंद्र गौड़ और इंडियन कॉइन सोसाइटी के अध्यक्ष एवं ओरिएंटल न्यूमिस्मैटिक सोसाइटी, यूके के सम्माननीय फेलो डॉ. प्रशांत कुलकर्णी आदि गणमान्यों की उपस्थिति रही।




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