
भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम (IIM), अहमदाबाद ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार पीएचडी प्रवेश में आरक्षण की शुरूआत की है। आईआईएम अहमदाबाद ने पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कोटा सिस्टम शुरू करने की घोषणा की है। भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIMA) ने निर्णय लिया है कि वह “सरकारी दिशा-निर्देशों” के अनुसार 2025 से पीएचडी प्रवेश में आरक्षण लागू करेगा।
आईआईएम अहमदाबाद के इस निर्णय से देश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ विकलांग उम्मीदवारों को देश के शीर्ष बिजनेस स्कूल की ओर से मैनेजमेंट डॉक्टरेट प्रोग्राम (या मैनेजमेंट में फेलो कार्यक्रम) में प्रवेश का मौका मिल सकेगा।
हालांकि कोटा सिस्टम लागू करने से संबंधित विस्तृत विवरण आना अभी बाकी है। इस संबंध में अधिसूचना जल्द ही जारी कर दी जाएगी, लेकिन संस्थान ने अपने नोटिस में लिखा है, “एडमिशन के दौरान आरक्षण को लेकर भारत सरकार के दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा।”
आईआईएम अहमदाबाद द्वारा पीएचडी में अभ्यास के लिए 19 सितंबर से एप्लीकेशन फॉर्म ऑनलाइन जारी किए गए हैं जिसमें एप्लीकेशन फीस 500 रुपये तय की गई है, लेकिन रिजर्व उम्मीदवारों के लिए एप्लीकेशन फीस 250 रुपये रहेगी। यह पहली बार है जब आईआईएम अहमदाबाद पीएचडी के कोर्स में आरक्षण नीति के तहत उम्मीदवारों को प्रवेश देगा। इससे पहले कभी भी आईआईएम अहमदाबाद ने पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण नीति को लागू नहीं किया था।
गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय में IIM अहमदाबाद की मौखिक टिप्पणियों के बाद यह निर्णय आया है, जिसमें कहा गया था कि 2025 से आरक्षण मिलेगा।
इस कदम के बाद यदि कोई उम्मीदवार अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी)/विकलांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी)/गैर-क्रीमी अन्य पिछड़ा वर्ग (एनसी-ओबीसी)/आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से है तो न्यूनतम पात्रता वाली डिग्री में 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी जाएगी।
Global IIM Alumni Network ने गुजरात उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, जिसमें IIMA के पीएचडी कार्यक्रमों में आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी। जनहित याचिका में कहा गया था कि 1971 में शुरू हुए आईआईएमए में पीएचडी कार्यक्रम में आरक्षण न देना संवैधानिक प्रावधानों, केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) या सीईआरए अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानदंडों का “घोर उल्लंघन” है।




Add comment