उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं। खासतौर पर पढ़ाई में पीछे रह जाने वाले छात्रों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक मदद देने पर जोर है। माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था पहले से की जाती रही है, जिसका उद्देश्य कमजोर छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता देना है।
इस तरह की कक्षाओं में छात्रों की विषयवार कमजोरियों को पहचानकर उन्हें अतिरिक्त अभ्यास और मार्गदर्शन दिया जाता है। इसका मकसद केवल बोर्ड परीक्षा के अंक बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों की बुनियादी समझ को मजबूत करना भी है।
कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों पर फोकस
उपचारात्मक शिक्षण का फोकस उन छात्रों पर रहता है जिनका प्रदर्शन नियमित आकलन में अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहता। ऐसे छात्रों को अतिरिक्त समय देकर कठिन विषयों और अध्यायों को दोबारा समझाया जा सकता है।
UPMSP की ओर से स्कूलों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर और कक्षा 9 से 12 तक की शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। बोर्ड की वेबसाइट पर प्रश्न बैंक भी उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल शिक्षक और छात्र परीक्षा की तैयारी में कर सकते हैं।
12वीं के छात्रों के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षा का विकल्प
UP Board में इंप्रूवमेंट परीक्षा को लेकर भी बदलाव महत्वपूर्ण हैं। 2026 की आधिकारिक व्यवस्था में हाईस्कूल के लिए इंप्रूवमेंट/कंपार्टमेंट परीक्षा और इंटरमीडिएट के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा से संबंधित अलग-अलग सूचनाएं जारी की गई हैं। UPMSP ने इसके लिए आवेदन प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी जानकारी अपनी वेबसाइट पर जारी की थी।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 12वीं के हर पास छात्र को किसी भी विषय में नंबर बढ़ाने के लिए सामान्य रूप से इंप्रूवमेंट परीक्षा का विकल्प मिल गया है। छात्रों को अपने परीक्षा वर्ष की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार पात्रता और नियमों की जांच करनी चाहिए।
11वीं-12वीं के परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
UP Board में मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक समझ आधारित बनाने की दिशा में भी बदलाव की तैयारी है। अगस्त 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 11 में नया मूल्यांकन पैटर्न लागू करने और बाद में इसे कक्षा 12 तक बढ़ाने की योजना है। इसके तहत लिखित परीक्षा 80 अंकों की होगी, जबकि बाकी 20 अंक प्रायोगिक परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन के जरिए दिए जाएंगे।
इस बदलाव का असर उन विषयों पर भी पड़ेगा जिनमें पारंपरिक रूप से प्रैक्टिकल परीक्षा नहीं होती थी। हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में भी 80 अंक की लिखित परीक्षा और 20 अंक के आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं जिन विषयों में प्रैक्टिकल होता है, वहां प्रैक्टिकल के अंकों का हिस्सा 30 से घटाकर 20 अंक करने की योजना बताई गई है।
रटने के बजाय समझ और इस्तेमाल पर जोर
नए परीक्षा ढांचे में केवल तथ्य याद करने के बजाय छात्रों की समझ और जानकारी के इस्तेमाल की क्षमता पर ज्यादा जोर देने की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक नए प्रश्नपत्रों में आवेदन आधारित सवालों को 35 प्रतिशत तक महत्व दिया जाएगा। इसके अलावा विश्लेषण, समझ, मूल्यांकन और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं को भी आकलन में शामिल किया जाएगा।
इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को केवल परीक्षा के लिए याद करने के बजाय विषय को समझकर जवाब देने के लिए तैयार करना है।
NCERT और अधिकृत किताबों पर जोर
पाठ्यपुस्तकों को लेकर भी UPMSP की ओर से आधिकारिक व्यवस्था जारी की जाती है। बोर्ड की वेबसाइट पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए NCERT और परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों की कीमत तथा अधिकृत मुद्रकों और वितरकों की सूची उपलब्ध कराई गई है।
इसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को अधिकृत पाठ्यपुस्तकों की जानकारी उपलब्ध कराना है। इसलिए निजी प्रकाशकों की किताबों पर पूरी तरह रोक लगने जैसे दावे करने के बजाय यह कहना ज्यादा सही है कि स्कूलों में बोर्ड द्वारा निर्धारित और अधिकृत पाठ्यपुस्तकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
इन बदलावों का असर सिर्फ बोर्ड परीक्षा के नतीजों तक सीमित नहीं है। अगर कमजोर छात्रों की पहचान समय पर हो और उन्हें नियमित अतिरिक्त सहायता मिले, तो वे परीक्षा से पहले अपने कमजोर विषयों पर काम कर सकते हैं। वहीं प्रस्तावित 80+20 मूल्यांकन व्यवस्था छात्रों के पूरे साल के प्रदर्शन को भी महत्व देने वाली हो सकती है।
छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे केवल बोर्ड परीक्षा के अंतिम कुछ महीनों में तैयारी शुरू न करें। UPMSP की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रश्न बैंक, शैक्षणिक कैलेंडर और आधिकारिक पाठ्यक्रम सामग्री का नियमित इस्तेमाल किया जा सकता है। परीक्षा पैटर्न में बदलाव की स्थिति में छात्रों को पुराने पेपर के साथ नए नमूना प्रश्नपत्रों पर भी अभ्यास करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर किए जा रहे ये बदलाव इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं कि छात्रों को केवल अंक हासिल करने के बजाय विषय को समझने और उसका इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाए। हालांकि, किसी भी नए नियम को लागू मानने से पहले छात्रों और अभिभावकों को UPMSP की ताजा आधिकारिक अधिसूचना जरूर देखनी चाहिए।




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