
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए मेडिकल दाखिले में NRI कोटे का दायरा बढ़ाने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने पंजाब के मेडिकल कॉलेज में एनआरआई प्रवेश को लेकर पंजाब सरकार की अपील याचिका खारिज कर दी और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए अप्रवासी भारतीयों के दूर के रिश्तेदारों को 15 फ़ीसदी आरक्षण देने को धोखाधड़ी बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनआरआई का कोटा मूल रूप से वास्तविक एनआरआई और उनके बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए था जिसमें उन्हें भारत में रहते हुए मेडिकल की शिक्षा मिल सके। लेकिन इसमें दूर के रिश्तेदारों को शामिल करके इसके मूल उद्देश्य को कमजोर कर दिया गया है जिसके कारण इसका दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब मेडिकल क्षेत्र में यह धोखाधड़ी समाप्त होनी चाहिए।
पंजाब सरकार ने 22 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए एनआरआई कोटा के दायरे को बढ़ाकर इसमें विदेश में रहने वालों के दूर के रिश्तेदारों, जैसे मामा, ताऊ-ताई, चाचा चाची, दादा-दादी को भी शामिल कर लिया था। उल्लेखनीय है कि पंजाब के लाखों लोग विदेश में जाकर बसे हुए हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की इस अधिसूचना को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह और कुछ नहीं बल्कि पैसा कमाने की मशीन है। पीठ ने कहा कि हम इस तरह की सभी याचिकाएं खारिज कर देंगे। यह एनआरआई व्यवसाय एक धोखाधड़ी के अलावा और कुछ नहीं है।




Add comment