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2028 में लॉन्च होगा भारत का शुक्रयान, 4 साल का होगा मिशन

भारत का पहला शुक्र मिशन मार्च 2028 में लॉन्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस मिशन की मंजूरी दे दी है। यह मिशन चार साल का होगा। वीनस यानी शुक्र ग्रह धरती से करीब 4 करोड़ किमी दूर है। वीनस को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह भी कहा जाता है। हालांकि यहां का दिन-रात पृथ्वी की तुलना में काफी लंबा होता है। दरअसल वीनस अपनी धुरी पर बहुत धीमे घूमता है। इसकी वजह से वीनस का एक दिन पृथ्वी के 243 दिनों के बराबर होता है।

भारत का ये मिशन वीनस ग्रह के ऑर्बिट की स्टडी करने के लिए भेजा जाएगा। मिशन के तहत भारत वीनस ग्रह की सरफेस, उसके एटमॉस्फियर (ग्रह का वायुमंडल), ऑयनोस्फियर (वायुमंडल का बाहरी हिस्सा, जहां से कम्यूनिकेशन और नेविगेशन वेव्स रिफ्लेक्ट होती हैं) की जानकारी जुटाएगा। वीनस ग्रह सूर्य के काफ नजदीक है। ऐसे में सूर्य का ग्रह पर कितना और क्या प्रभाव पड़ता है, इस मिशन के तहत इसका भी पता लगाया जाएगा।

वीनस ग्रह पर टेंपरेंचर ज्यादा होने के चलते कोई भी लैंडर दो घंटे से ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाया। वीनस पर पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना में बहुत ज्यादा है। इसको आसान भाषा में समझें तो, यहां इतना प्रेशर है, जितना पृथ्वी में समंदर के नीचे महसूस होता है।

शुक्र पृथ्वी की तुलना में अपनी धुरी पर बहुत धीरे घूमता है। शुक्र का एक चक्कर लगभग पृथ्वी के 243 दिनों के बराबर होता है। वीनस ग्रह अन्य ग्रहों की तुलना में उल्टा घूमता है। यह पृथ्वी की विपरीत दिशा में घूमता है। इसका मतलब है कि शुक्र ग्रह पर सूर्य पश्चिम में उगता है और पूर्व में अस्त होता है।

 

Asmita Sarkar

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