भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) ने परिसर में भेदभाव रोकने और सभी छात्रों को सम्मानजनक माहौल देने के लिए अपने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन दिशानिर्देश फिर से जारी किए हैं। संस्थान ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे किसी छात्र से उसकी जाति, एडमिशन कैटेगरी, JEE Advanced की रैंक या GATE के स्कोर के बारे में सवाल न पूछें। संस्थान के अनुसार, ऐसे सवाल अनजाने में भी भेदभाव और पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकते हैं।
डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के कार्यालय की ओर से 13 अक्टूबर 2026 को ईमेल के जरिए ये दिशानिर्देश दोहराए गए। इनमें जातिवादी और अपमानजनक मजाक, धर्म या यौन अभिरुचि के आधार पर भेदभाव करने वाली टिप्पणियों और ऑनलाइन संदेशों पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
जाति और एडमिशन कैटेगरी पूछना क्यों अनुचित?
IIT बॉम्बे के अनुसार, किसी छात्र से उसकी जन्मजात जाति या प्रवेश के समय मिली श्रेणी के बारे में पूछना अनुचित है। इसी तरह JEE Advanced की रैंक, GATE स्कोर या ऐसी दूसरी जानकारी पूछने से भी बचना चाहिए, जिससे छात्र की जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि का अंदाजा लगाया जा सके।
संस्थान का कहना है कि सवाल पूछने वाले का मकसद भले ही केवल जिज्ञासा हो, लेकिन इससे दूसरे छात्र को असहज महसूस हो सकता है। ऐसे सवाल उसके प्रति गलत धारणा या भेदभाव की स्थिति भी पैदा कर सकते हैं।
IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया है कि वह संविधान के अनुसार आरक्षण नीति लागू करने और सभी छात्रों को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान चाहता है कि छात्रों के साथ उनकी जाति, धर्म या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर अलग व्यवहार न किया जाए।
जातिवादी मजाक और सोशल मीडिया संदेशों पर भी रोक
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि जातिवादी, नफरत फैलाने वाले, अपमानजनक या महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण संदेश साझा करना या आगे भेजना स्वीकार्य नहीं है। धर्म या यौन अभिरुचि के आधार पर किसी के प्रति नफरत दिखाने वाले संदेशों और ऐसे मजाक पर भी रोक है, जिन्हें उत्पीड़न या किसी को परेशान करने के रूप में देखा जा सकता है।
ये नियम केवल आमने-सामने की बातचीत पर लागू नहीं होते। WhatsApp, Facebook, ईमेल और दूसरे ऑनलाइन माध्यमों से किए जाने वाले संवाद भी इनके दायरे में आते हैं। संस्थान ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों को साझा रुचियों के जरिए जुड़ने की सलाह
IIT बॉम्बे ने छात्रों को आपसी मेलजोल बढ़ाने के लिए पढ़ाई, विभाग, खेल, संगीत, फिल्में, शौक और अपने गृह नगर जैसे विषयों पर बातचीत करने की सलाह दी है। संस्थान का मानना है कि ऐसी साझा रुचियों के जरिए छात्र एक-दूसरे को बेहतर समझ सकते हैं और परिसर में सम्मानजनक माहौल बना सकते हैं।
क्या ये नई गाइडलाइन हैं?
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि IIT बॉम्बे ने भेदभाव रोकने से जुड़े ये दिशानिर्देश पहली बार जारी नहीं किए हैं। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइन पहली बार 31 जुलाई 2023 को जारी की गई थी। अक्टूबर 2026 में इन्हें दोबारा सामने लाया गया।
इन दिशानिर्देशों को दोहराने का मामला परिसर में छात्र सुरक्षा और जातिगत भेदभाव को लेकर बढ़ी चिंता के बीच सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की सितंबर 2026 में हुई मौत के बाद उनके परिवार ने जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए थे। इन आरोपों और घटना की जांच से जुड़े तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस बीच, कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने केवल पुराने दिशानिर्देश दोहराने के बजाय संस्थान से सीधे बातचीत और भेदभाव की शिकायतों पर ठोस कदम उठाने की मांग की है। ऐसे में चुनौती सिर्फ नियम जारी करने की नहीं, बल्कि शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करने और छात्रों का भरोसा बनाए रखने की भी है।




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