दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए सीधे पीएचडी में प्रवेश से जुड़ी प्रवेश परीक्षा का पैटर्न और पाठ्यक्रम जारी किया है। इस व्यवस्था के तहत वे विद्यार्थी पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने स्नातक के चौथे वर्ष में शोध प्रबंध, अकादमिक परियोजना या उद्यमिता से जुड़ा काम किया है, लेकिन यूजीसी-सीएसआईआर नेट, गेट या अन्य निर्धारित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
विश्वविद्यालय की इस व्यवस्था का उद्देश्य चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के दौरान शोध और परियोजना कार्य करने वाले विद्यार्थियों को पीएचडी में आगे बढ़ने का अवसर देना है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करना जरूरी होगा। प्रवेश परीक्षा की तारीख और आवेदन से संबंधित अन्य निर्देश विश्वविद्यालय की ओर से अलग से जारी किए जाएंगे।
DU PhD Admission 2026: कौन कर सकता है आवेदन?
दिल्ली विश्वविद्यालय के इस पीएचडी प्रवेश मार्ग के लिए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के अनुसार आठ सेमेस्टर का चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करना होगा।
शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों का न्यूनतम सीजीपीए 7.5 होना जरूरी है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम सीजीपीए 7.0 निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा, स्नातक के चौथे वर्ष में शोध प्रबंध (Dissertation), अकादमिक परियोजना या उद्यमिता से संबंधित कार्य करना अनिवार्य है। केवल अनुवाद कार्य को इस शर्त को पूरा करने वाला कार्य नहीं माना जाएगा।
इसलिए, जिन विद्यार्थियों ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा किया है, उन्हें आवेदन करने से पहले अपने सीजीपीए, चौथे वर्ष में किए गए कार्य और विश्वविद्यालय की ओर से जारी पात्रता संबंधी शर्तों की जांच कर लेनी चाहिए।
DU PhD Entrance Exam Pattern: कैसी होगी प्रवेश परीक्षा?
दिल्ली विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा दो घंटे की होगी और इसके कुल अंक 100 होंगे। परीक्षा को दो भागों में बांटा गया है। पहला भाग शोध पद्धति (Research Methodology) पर आधारित होगा, जबकि दूसरा भाग उम्मीदवार के संबंधित विषय से जुड़ा होगा।
दोनों भागों के लिए 50-50 अंक निर्धारित किए गए हैं। परीक्षा में गलत उत्तर देने पर संबंधित प्रश्न के निर्धारित अंकों का 25 प्रतिशत काटा जाएगा। इसलिए विद्यार्थियों को तैयारी के साथ-साथ प्रश्नों का उत्तर देते समय सावधानी बरतनी होगी।
प्रवेश परीक्षा के बाद योग्य उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए पात्र होने के लिए प्रवेश परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए यह न्यूनतम सीमा 45 प्रतिशत है।
PhD Admission Selection Process: प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार का कितना होगा वेटेज?
पीएचडी में अंतिम चयन केवल प्रवेश परीक्षा के अंकों के आधार पर नहीं होगा। इसमें प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार, दोनों को महत्व दिया जाएगा।
अंतिम चयन में प्रवेश परीक्षा के अंकों का 70 प्रतिशत और साक्षात्कार का 30 प्रतिशत वेटेज होगा। इसका अर्थ है कि उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा की तैयारी के साथ अपने शोध विषय, परियोजना और प्रस्तावित शोध कार्य की जानकारी भी अच्छी तरह तैयार रखनी होगी।
साक्षात्कार से पहले उम्मीदवारों को अपने शोध या परियोजना की रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसलिए, चौथे वर्ष में किए गए शोध प्रबंध या परियोजना से संबंधित सामग्री को व्यवस्थित रखना उपयोगी होगा।
DU PhD Syllabus: अलग-अलग विषयों के लिए अलग पाठ्यक्रम
दिल्ली विश्वविद्यालय ने विषयों के अनुसार शोध पद्धति का पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। वाणिज्य, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान और गृह विज्ञान जैसे विषयों के उम्मीदवारों के लिए संबंधित पाठ्यक्रम लागू होगा।
वहीं, विज्ञान, गणित, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और कंप्यूटर विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अलग पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है। उम्मीदवारों को अपने विषय के अनुसार पाठ्यक्रम का अध्ययन करना चाहिए, ताकि परीक्षा की तैयारी सही दिशा में की जा सके।
शोध पद्धति के साथ संबंधित विषय की तैयारी पर भी ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि परीक्षा में दोनों भागों के लिए बराबर अंक निर्धारित हैं।
विद्यार्थियों को अब क्या करना चाहिए?
फिलहाल, उम्मीदवारों को दिल्ली विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रवेश परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया और अन्य जरूरी निर्देशों से जुड़ी घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए। आवेदन की समय-सीमा, परीक्षा कार्यक्रम और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में अंतिम जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना से ही सुनिश्चित करें।
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश का यह विकल्प उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो स्नातक स्तर पर शोध या परियोजना का अनुभव हासिल कर चुके हैं और आगे अकादमिक या शोध के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। हालांकि, आवेदन करने से पहले विश्वविद्यालय की विस्तृत पात्रता शर्तों और प्रवेश संबंधी नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।




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