
दक्षिणी राजस्थान में भील प्रदेश बनाने की मांग को लेकर छिड़ी बहस ने एक नया मोड़ आ गया है, जब कक्षा 9 की एक पाठ्यपुस्तक में गोविंद गुरु द्वारा भील प्रदेश की स्थापना की योजना का उल्लेख सामने आया। इस पर सांसद मन्नालाल रावत ने आपत्ति जताई और राज्य सरकार से इसे हटाने की मांग की। उनकी अपील के बाद राजस्थान सरकार ने इस विवादित तथ्य को पुस्तक से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल द्वारा प्रकाशित पुस्तक राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परंपरा के अध्याय 4 के पृष्ठ 42 पर लिखा गया था कि गोविंद गुरु और उनके शिष्यों ने औपनिवेशिक और सामंती उत्पीड़न से मुक्ति पाने के लिए भील राज्य की स्थापना की योजना बनाई थी। इस तथ्य पर बीजेपी सांसद मन्नालाल रावत ने कड़ा विरोध जताया और इसे हटाने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि गोविंद गुरु का उद्देश्य राष्ट्रीय चेतना जगाना था, न कि भील राज्य की स्थापना।
रावत के मुताबिक ब्रिटिश काल में गोविंद गुरु पर जबरन भील राज्य की मांग का आरोप लगाया गया था, जो कि वास्तविकता से परे है। उनके मुताबिक गोविंद गुरु का आंदोलन अहिंसक और राष्ट्रीय था। इसके साथ, बीजेपी ने भारत आदिवासी पार्टी (बाप) पर देश तोड़ने की मानसिकता फैलाने का आरोप लगाया है, क्योंकि बाप ने भील प्रदेश की मांग को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल किया है और आदिवासी युवाओं को इस मुद्दे पर संगठित कर रही है। इस घटनाक्रम के बाद शिक्षा विभाग ने पाठ्यक्रम से इस विवादित तथ्य को हटाने का आदेश दिया है।




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