महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार की ओर से परीक्षा शुल्क माफ करने के फैसले के बाद राज्य की 26 विश्वविद्यालयों के 2,40,365 विद्यार्थी सेमेस्टर परीक्षा फॉर्म बिना शुल्क के भर चुके हैं। इस फैसले का उद्देश्य सूखे से प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ कम करना और उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है।
राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया है। इसके तहत चिह्नित सूखा प्रभावित तालुकाओं के विद्यार्थियों से विश्वविद्यालयों को परीक्षा शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया गया है। ऐसे तालुकाओं की संख्या पहले 265 थी, जिसे बढ़ाकर अब 305 कर दिया गया है।
उच्च शिक्षा निदेशक शैलेंद्र देवलंकर ने भी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया था कि वे इस शुल्क माफी की जानकारी देने के लिए आधिकारिक सूचना जारी करें, ताकि पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिल सके।
मुंबई यूनिवर्सिटी 3.5 करोड़ रुपये का परीक्षा शुल्क लौटाएगी
मुंबई यूनिवर्सिटी ने पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क के रूप में जमा किए गए 3.5 करोड़ रुपये लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महाराष्ट्र में इस फैसले से लाभ पाने वाले विद्यार्थियों की कुल संख्या पांच लाख से अधिक होने की उम्मीद है।
जिन विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क माफी का लाभ लेने में परेशानी हो रही है, उन्हें अपने विश्वविद्यालय की ओर से नियुक्त नोडल अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
छात्रों पर आर्थिक बोझ कम करना सरकार का लक्ष्य
महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि सूखा प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े और उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
परीक्षा शुल्क माफ करने का उद्देश्य सूखे से प्रभावित विद्यार्थियों को तत्काल आर्थिक राहत देना है। इसके तहत विश्वविद्यालयों से कहा गया है कि वे सरकारी फैसले को लागू करें और पात्र विद्यार्थियों तक इसकी जानकारी पहुंचाएं, ताकि कोई भी योग्य छात्र इस सुविधा से वंचित न रहे।




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