
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मेडिकल स्टूडेंट्स के हित में बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने मेडिकल कॉलेजों द्वारा क्वालिटी के नाम पर स्टूडेंट्स से पैसे ऐंठने जैसी ब्लैकमेलिंग पर लगाम कसने की कोशिश की है।
गौरतलब है कि देश के कई मेडिकल कॉलेजों में स्टूडेंट्स से एक्स्ट्रा पैसे ऐंठने के लिए बेवजह उन्हें परेशान किया जाता है। उन्हें थीसिस और डिजर्टेशन को लेकर ब्लैकमेल किया जाता है। दरअसल, नीट पीजी पास करके मेडिकल पीजी कोर्सेस एमडी, एमएस, वगैरह की पढ़ाई करने वालों को फाइनल ईयर में थीसिस जमा करनी होती है। लेकिन मेडिकल कॉलेज पैसे ऐंठने के लिए स्टूडेंट्स को थीसिस में जानबूझकर फेल कर देते हैं। फिर उन्हें पास कराने के लिए डोनेशन मांगे जाते हैं। ये उत्पीड़न इस स्तर का होता है कि कुछ मामलों में स्टूडेंट्स अपनी जान तक दे देते हैं। कुछ पढ़ाई छोड़ देते हैं। ये मेडिकल स्टूडेंट्स अपने फाइनल एक्जाम नहीं दे पाते। इन्हें परीक्षा में बैठने से ही रोक दिया जाता है।
अब एनएमसी ने एक नोटिस जारी करके ये स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्टूडेंट को थीसिस के कारण फाइनल एग्जाम में बैठने से रोका नहीं जा सकता है। फिर चाहे उनके एचओडी ने उनकी थीसिस/ डिजर्टेशन अप्रूव की हो या नहीं। इसके अलावा आयोग ने राज्य से बाहर के एक एक्सटर्नल एग्जामिनर को भी थीसिस की जांच की प्रक्रिया और वायवा में शामिल करने का निर्देश दिया है।
अब पीजी मेडिकल कोर्स में डिजर्टेशन क्लिनिकल/ प्रैक्टिकल और वायवा के कुल मार्क्स के 5% अंकों का होगा। यानी 20 अंक डिजर्टेशन के लिए होंगे।
एनएमसी सेक्रेटरी डॉ. बी श्रीनिवास का कहना है कि ‘स्टूडेंट्स की जमा की गई थीसिस अप्रूव करने को कुछ संस्थानों ने छात्रों को ब्लैकमेल करने का हथियार बना लिया है। जबकि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 (PGMER) में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि पीजी मेडिकल फाइनल एग्जाम से पहले थीसिस जमा करना और अप्रूव कराना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में एक्सटर्नल एग्जामिनर को शामिल करने से इस हरकत पर लगाम लगाई जा सकती है।’




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