
यूपी के सभी स्कूलों-शिक्षा संस्थाओं में सुरक्षा के इंतजाम परखे जाएंगे। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है। उत्तर प्रदेश के स्कूलों, मदरसों और कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्रों का जीवन सुरक्षित है या नहीं? उनके किसी आपदा का शिकार होने की आशंका तो नहीं है। वे कानून-व्यवस्था के नजरिये से सुरक्षित हैं अथवा नहीं। इसके मद्देनजर प्रदेश के सभी स्कूलों, मदरसों और उच्चशिक्षा संस्थानों की मौके पर जाकर जांच की जाएगी। इसके लिए सरकार ने स्कूलों में सुरक्षा जांच का विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है।
इसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों व मदरसों के भवनों की नेशनल बिल्डिंग कोड-2005 के मानकों के आधार पर जांच की जाएंगी।
इस संबंध में शासन ने बेसिक माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा सहित समाज कल्याण तथा अल्पसंख्यक कल्याण के प्रमुख सचिवों के अलावा प्रदेश सभी डीएम एवं जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के अध्यक्षों समेत स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं विभिन्न शिक्षा निदेशकों को निर्देश जारी किया है।
स्कूलों या अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की परोक्ष एवं अपरोक्ष सुरक्षा को लेकर केन्द्र सरकार की ओर से आपदा प्रबन्धन ने 2016 में स्कूल सुरक्षा नीति जारी की थी। इसे पूरे देश के शिक्षण संस्थानों में लागू किया जाना था लेकिन इस पर गंभीरता से अमल नहीं होने पर इसको लेकर पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर हुई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने इस पर सभी पक्षों के नाम सर्कुलर जारी किया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे सुरक्षा सम्बन्धी रिपोर्ट सरकार को भेजें। निर्देश में सभी जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि अगर उनके निरीक्षण व जांच के बाद किसी भी शिक्षण संस्थान में मानवीय त्रुटियों के कारण किसी प्रकार का हादसा होता है तो संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर निजी व स्ववित्त पोषित संस्थानों के प्रबन्धक को जिम्मेदार माना जाएगा।




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