
आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के वाणिज्य विभागीय संघ ने “शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के पहले सत्र के आयोजन में विशेष अतिथि प्रोफेसर रितीश कुमार सिंह, प्रमुख और डीन, वाणिज्य विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने विचार शिक्षकों व छात्रों के बीच साझा किए। इस सत्र का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में एआई के उपयोग और उससे होने वाले संभावित प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करना था। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रोफेसर ज्ञानतोष कुमार झा सहित विभिन्न संकाय सदस्य जिनमें प्रोफेसर संदीप कुमार, डॉ.बजरंग कुमार प्रशांत, डॉ.बलजीत कौर आदि भी उपस्थित थीं ।
कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञान के प्रतीक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें संकाय सदस्यों और बाहर से आए अतिथियों ने हिस्सा लिया। इसके पश्चात प्राचार्य ने प्रोफेसर रितीश कुमार सिंह को कॉलेज की ओर से सम्मानित किया। अपने व्याख्यान के दौरान प्रोफेसर सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि अगर इसे सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह शिक्षा को और अधिक प्रभावी बना सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई का उपयोग छात्रों को व्यावहारिक और उद्योग से जुड़ा ज्ञान प्रदान करने में मदद कर सकता है, जिससे उनकी नौकरी की तैयारी भी बेहतर होगी।
प्रोफेसर सिंह ने एक हल्के-फुल्के और हास्यपूर्ण अंदाज में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जो उन्होंने मास्टर कोर्स के छात्रों को पढ़ाते समय महसूस किए। उन्होंने बताया कि कैसे एआई टूल्स को अपनाकर जटिल विषयों को आसान बनाया जा सकता है, और छात्रों को एक बेहतर और दिलचस्प शिक्षण अनुभव प्रदान किया जा सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षकों को आह्वान किया कि वे पारंपरिक “पैडागॉजी” से हटकर “एंड्रागॉजी” की ओर बढ़ें, जो वयस्क शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है।
कार्यक्रम के अंत में एक संक्षिप्त प्रश्नोतर सत्र हुआ, जिसमें छात्रों ने एआई के विभिन्न पहलुओं पर सवाल पूछे। इसके बाद वाणिज्य विभाग सोसाइटीकी संयोजक, डॉ. बलजीत कौर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने संकाय, छात्रों और आयोजन टीम के समर्पण और प्रयासों की सराहना की। सत्र ने शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए एआई के प्रति एक नई दृष्टि को उजागर किया, जिसमें न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की संभावना पर बल दिया गया, बल्कि शिक्षण के तरीकों में सुधार करने की आवश्यकता भी बताई गई।




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