
छात्राओं के नाम पर सरकारी योजनाओं की घोषणा का धरातल पर कितना और कैसा अमल होता है, इसका एक ताज़ा उदाहरण राजस्थान से सामने आया है। यहां सरकार ने प्रतिभावान छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए कालीबाई भील स्कूटी वितरण और देवनारायण योजना के तहत स्कूटी देने की घोषणा की थी। ये स्कूटी तो छात्राओं को नहीं ही मिली, उलटे ये टू व्हीलर्स पड़े पड़े कबाड़ हो गए। स्कूटी की सरकारी खरीदारी मगर ज़रूर हुई क्योंकि इसमें कमीशन का खेल होता है, लेकिन खरीदारी के बाद इसकी सुध किसी ने नहीं ली। और न इस बात का ध्यान रखा गया कि समय पर यह छात्राओं में वितरित कर दी जाएं।
दरअसल, राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के एक स्कूल में रखी 600 स्कूटी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ये स्कूटी पिछले 2 साल से खडी हुई हैं और अब कबाड़ में बदल गई हैं। 10वीं और 12वीं की छात्राओं को देने के लिए ये स्कूटी खरीदी गई थी। कुछ छात्राओं को तो स्कूटी दी गईं, लेकिन 600 स्कूटी बेकार हो गई हैं। यानी राजस्थान सरकार का छात्राओं को स्कूटी देने का वादा भी अब कबाड़ में रूप में एक जगह पड़ा है। इससे सरकारी खजाने का पैसा भी बर्बाद हुआ है।
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में 65 फ़ीसदी और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में 75% से ऊपर अंक लाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का ऐलान किया गया था। बांसवाड़ा जिले के स्कूल में रखी स्कूटी छात्राओं को दी जानी थी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 1090 स्कूटी खरीदी गई थी। कुछ स्कूटी का वितरण हुआ मगर राजकीय कन्या महाविद्यालय मे 600 स्कूटी पड़े पड़े अब कबाड़ में बदल चुकी हैं। इनमें झाड़ झंकार भी लग गए हैं।
प्रिंसिपल डॉ सरला पंड्या का कहना है, स्कूटी बांटने के लिए क्यूआर कोड जरूरी था। वह अभी तक जनरेट नहीं हुए हैं जिसके कारण छात्राओं को स्कूटी नहीं दी गई है। वित्त विभाग की ओर से अभी तक क्यूआर कोड जारी नहीं होने से इसका वितरण नहीं किया जा सका, जैसे ही सरकार द्वारा इसकी स्वीकृति दी जाएगी तो संबंधित छात्राओं को इन्हें बांट दिया जाएगा।
सरकारी नियम कानून और गैर जिम्मेदारी का इससे बड़ा क्या सबूत हो सकता है कि जिन छात्राओं को यह स्कूटी दी जानी थी, वे स्कूल की पढ़ाई पूरी करके कॉलेज में चली गई हैं लेकिन उनके नाम पर खरीदी गयीं करोड़ों रुपए की स्कूटी वहीं खड़ी हुई है।




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