
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभागों व कॉलेजों में पिछले दो साल से सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। अभी तक कॉलेजों में शिक्षकों के 80 फीसदी पदों को भरा जा चुका है यानी 4700 पदों पर नियुक्ति की जा चुकी है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक ईडब्ल्यूएस सीटें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों/कॉलेजों को आबंटित नहीं की है। शिक्षा मंत्रालय ने पिछले दिनों डूटा को यह आश्वासन दिया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 75 फीसदी पदों पर स्थायी नियुक्ति के बाद ईडब्ल्यूएस सीटें दी जाएंगी, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद शिक्षा मंत्रालय से अभी तक सीटें नहीं मिली हैं। उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्रालय ने कॉलेजों से ईडब्ल्यूएस की बढ़ने वाली सीटों के आंकड़े भी मंगवा लिए हैं, इसके बावजूद सीट आवंटन में देरी हो रही है। डीयू में ईडब्ल्यूएस कोटे की लगभग 3000 सीटें बनती है। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द ईडब्ल्यूएस सीटों को आबंटित करें जिससे कि कॉलेजों को ईडब्ल्यूएस सीटों का लाभ मिल सके।
फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव (कॉलेजिज) ने एक साल पहले विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सभी कॉलेजों के प्राचार्यो तथा संस्थान के निदेशकों को सर्कुलर जारी करते हुए ईडब्ल्यूएस की 10 फीसदी अतिरिक्त पदों की आवश्यकता के विषय में जानकारी मांगी थी कि 10 फीसदी सीटों के बढ़ने पर उनके कॉलेज में कितने शिक्षक पदों की आवश्यकता है। कॉलेजों से उनके आंकड़े देने को कहा था। कॉलेजों के प्राचार्यों ने शैक्षिक व गैर शैक्षिक पदों के आंकड़े विश्वविद्यालय को भेज दिए। भेजें गए शैक्षिक पदों के आंकड़ों को लेकर पिछले दिनों डूटा के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय भागी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिले थे। शिक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे ही अपने कॉलेजों में शिक्षकों की 75 फीसदी पदों पर स्थायी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेगा, शिक्षा मंत्रालय उन्हें ईडब्ल्यूएस के कारण बढ़ी सीटें दे देगा। डॉ.सुमन ने बताया है कि वर्तमान डीयू कॉलेजों में 80 फीसदी सहायक प्रोफेसरों की स्थायी नियुक्ति हो चुकी है तथा स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। बावजूद इसके अभी तक शिक्षा मंत्रालय ने अपना आश्वासन पूरा नहीं किया। उन्होंने बताया है कि शैक्षिक सत्र 2025 –26 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत छात्र चौथे वर्ष में प्रवेश कर जाएंगे जहाँ शिक्षकों की मांग बढ़ जाएगी। कॉलेजों में अभी तक स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर की गई है ।
डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शैक्षिक पदों पर ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को 10 फीसदी अतिरिक्त सीटों का ब्यौरा 46 कॉलेजों के प्राचार्यों ने दिया है। कॉलेजों के प्राचार्यो ने छात्रों की बढ़ी संख्या के आधार पर 25 फीसदी अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की है। बाकी लगभग 35 कॉलेजों ने अभी आंकड़े जारी नहीं किए। डॉ.सुमन का कहना है कि कॉलेजों व संस्थानों में ईडब्ल्यूएस की अतिरिक्त सीटों के बढ़ने से सामान्य वर्गों/आरक्षित वर्गो के उन एडहॉक टीचर्स को राहत मिलेगी जिनकी सीटें 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस में चली गई थीं तथा स्थायी नियुक्ति के समय कुछ कॉलेजों से डिस्प्लेसमेन्ट भी हुए हैं । उन्होंने यह भी बताया है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कारण रोस्टर में बदलाव से सबसे ज्यादा एससी/एसटी व ओबीसी कोटे के अभ्यर्थियों का नुकसान हुआ है क्योंकि आरक्षित वर्गों को अभी तक बैकलॉग व शॉटफाल सीटें नहीं मिली है।
डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उम्मीदवारों के लिए ईडब्ल्यूएस सीटों के मिलने पर समाज के सभी कमजोर वर्गों के शिक्षकों के साथ सामाजिक न्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि शिक्षा मंत्रालय से सीटें मिलने के बाद कॉलेजों को फिर से रोस्टर रजिस्टर तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन से पास कराकर पदों को विज्ञापित किया जाएगा। उनका कहना है कि किन्हीं कारणों से स्थायी नियुक्ति के समय आरक्षित वर्गो व सामान्य वर्गों के शिक्षक डिस्प्लेसमेन्ट हुए है उन्हें इन पदों पर अवसर दिया जाएगा। फोरम की पहली प्राथमिकता है रोस्टर के कारण पदों के घटने से जो शिक्षकों बाहर हुए पहले उन शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। डॉ.सुमन ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से मांग की है कि दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों में भी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए यूजीसी और दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश जारी कर स्थायी सहायक प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति कराए, क्योंकि यहाँ पर भी पिछले एक दशक से स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है।




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