
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के छात्रों के विदेश जाने के निर्णय को बीमारी बताने वाले बयान पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों का विदेश जाना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि बीमार शिक्षा प्रणाली का लक्षण मात्र है जो राजनीतिक हस्तक्षेप से और भी बदतर होती जा रही है।
बता दें कि शनिवार को राजस्थान के सीकर में बोलते हुए धनखड़ ने कहा था कि आज के समय में छात्रों का विदेश जाना देश के बच्चों के लिए नई बीमारी है। उन्होंने इसे विदेशी मुद्रा की बर्बादी और प्रतिभा की बर्बादी बताया था। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने ये भी कहा था कि 18 से 24 साल के लड़के-लड़कियां विज्ञापन से प्रभावित होकर विदेश जाने का निर्णय लेते हैं।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान पर कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि माननीय उपराष्ट्रपति ने दुख जताया है कि विदेश जाना छात्रों के लिए एक नई बीमारी बन गई है। वास्तव में यह एक पुरानी बीमारी है, जो कई दशकों से छात्रों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि मैं भी 1975 में इस वायरस से संक्रमित हुआ था, लेकिन समय रहते ठीक हो गया और 1980 में भारत वापस आ गया।
जयराम रमेश ने कहा कि छात्र अब कई कारणों से विदेश जाते हैं। सीयूईटी कई युवाओं को दूर भगाता है। शिक्षा की गुणवत्ता और पेशेवर अवसरों में अंतर बहुत स्पष्ट है। इनमें से कई संस्थानों को जिस तरह से चलाया जाता है, वह निराशाजनक है। छात्रों का विदेश जाना कोई बीमारी नहीं है, यह केवल एक बीमार शिक्षा प्रणाली का लक्षण है, जो राजनीतिक हस्तक्षेप से और भी खराब होती जा रही है।




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